मनरेगा में ‘फोटो हाजिरी’ का खेल? मेरठ के सैफपुर-फिरोजपुर में ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
मेरठ: मनरेगा में 'फोटो हाजिरी' का खेल? सैफपुर-फिरोजपुर के ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, जांच की मांग
रामराज/बहसूमा (मेरठ)। मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र के ग्राम सैफपुर-फिरोजपुर में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कार्यों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर बिना वास्तविक कार्य कराए ही लोगों की केवल फोटो खींचकर मनरेगा में उपस्थिति दर्ज की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा के तहत गांव में चल रहे कई कार्यों में वास्तविक मजदूरों से काम नहीं कराया जा रहा, बल्कि केवल औपचारिकताएं पूरी कर कागजी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। उनका आरोप है कि कई ऐसे लोगों की भी हाजिरी लगाई गई, जिन्होंने मौके पर कोई कार्य नहीं किया। इसे लेकर गांव में असंतोष का माहौल है।
ग्रामीण कंवरपाल ने लगाए गंभीर आरोप
गांव निवासी कंवरपाल ने आरोप लगाया कि सैफपुर-फिरोजपुर में मनरेगा कार्यों में लंबे समय से अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। उनके अनुसार कई विकास कार्य कागजों में पूरे दिखा दिए जाते हैं, जबकि धरातल पर उनकी वास्तविक स्थिति अलग दिखाई देती है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पंचायत अधिकारी को दी गई शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले से पंचायत अधिकारी धीर सिंह को भी अवगत करा दिया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो मनरेगा कार्यों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
सरकार की मंशा पर पानी फेरने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि यदि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में अनियमितताएं हो रही हैं तो इससे सरकार की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की छवि प्रभावित होती है। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक पक्ष का इंतजार
फिलहाल इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। News Highway इस मामले में प्रशासन का पक्ष भी प्रकाशित करेगा। यदि जांच में आरोप गलत पाए जाते हैं तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादकीय नोट: यह समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष आने के बाद यदि कोई आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
