ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा: खुले गड्ढे में डूबने से केंद्रीय विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल के मासूम बेटे की मौत, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा: खुले गड्ढे में डूबने से केंद्रीय विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल के मासूम बेटे की मौत, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र में शनिवार (25 जुलाई 2026) की शाम एक दर्दनाक हादसे में केंद्रीय विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल के मासूम बेटे की जान चली गई। प्राधिकरण द्वारा बोरिंग के लिए खोदे गए करीब 15 फीट गहरे खुले गड्ढे में बारिश का पानी भर गया था। खेलते समय बच्चा फिसलकर गड्ढे में गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्रिकेट खेलते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल का बेटा अव्यान सूर्या शनिवार शाम करीब 6:30 बजे नॉलेज पार्क-2 स्थित कलाधाम सोसायटी के पास अन्य बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। इसी दौरान गेंद के पीछे भागते समय वह बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गड्ढा काफी गहरा था और उसमें बारिश का पानी भरा हुआ था। बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गड्ढे के चारों ओर नहीं थी कोई सुरक्षा व्यवस्था
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गड्ढा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बोरिंग कार्य के लिए खुदवाया था, लेकिन इसके चारों ओर न तो बैरिकेडिंग की गई थी और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। बारिश के कारण गड्ढा पूरी तरह पानी से भर गया, जिससे उसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
प्राधिकरण ने की कार्रवाई
हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार मनोज जैन, सुपरवाइजर जॉनी और टेक्निकल सुपरवाइजर आकाश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
इसके अलावा, प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर प्राधिकरण ने अपने दो कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण कार्य या खुदाई वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था अनिवार्य होती है। इन नियमों का पालन न होने पर ऐसे हादसे होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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