मेरठ। हस्तिनापुर के चर्चित स्कूल संचालक अतुल हत्याकांड में सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है। आखिर अतुल की मौत किस वजह से हुई? क्या जहरीले सांप कॉमन करैत के डंसने से गई, या फिर दूध में मिलाई गई 25 नींद की गोलियां ही मौत की वजह बनीं? अब इसका जवाब सिर्फ फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट ही दे सकेगी।
पोस्टमार्टम में साफ नहीं हुआ मौत का कारण
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान मौत का स्पष्ट कारण तय नहीं हो सका। विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 25 नींद की गोलियां भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
इसी वजह से चिकित्सकों ने विसरा सुरक्षित रखकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत की वजह सांप का जहर था, नींद की गोलियों का असर या दोनों का संयुक्त प्रभाव।
दूध में मिलाई गई थीं 25 नींद की गोलियां
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी दामिनी ने वारदात से पहले अतुल को दूध में 25 नींद की गोलियां मिलाकर पिलाईं। इसके बाद कथित तौर पर कॉमन करैत प्रजाति के जहरीले सांप से उसे कटवाया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि अधिक मात्रा में नींद की गोलियों के असर के कारण अतुल खुद का बचाव नहीं कर सका।
करैत सांप का भी कराया गया पोस्टमार्टम
इस मामले में बरामद कॉमन करैत सांप का भी विशेषज्ञों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया।
रिपोर्ट में सामने आया कि सांप को दो दिन तक भूखा रखा गया था और उस पर तीन बार हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हुई।
पुलिस जांच के अनुसार, यह सांप कथित तौर पर सोनू और उदय ने तुषार द्वारा दिए गए 15 हजार रुपये से किसी सपेरे से खरीदा था।
क्यों खतरनाक माना जाता है कॉमन करैत?
कॉमन करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में गिना जाता है। इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है क्योंकि इसके विष में मौजूद न्यूरोटॉक्सिन तंत्रिका तंत्र पर तेजी से असर करता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इसके काटने पर कई बार शुरुआती दर्द या सूजन बहुत कम होती है, जिससे पीड़ित को तुरंत गंभीरता का अहसास नहीं होता। यह सांप अधिकतर रात में सक्रिय रहता है।
गूगल पर किया था यह सर्च
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वारदात से पहले आरोपी दामिनी ने कथित तौर पर गूगल पर सर्च किया था कि सांप के काटने के बाद कोई व्यक्ति कितनी देर तक जीवित रह सकता है।
जांच के अनुसार, सर्च में मिली जानकारी के मुताबिक व्यक्ति कुछ समय तक सामान्य बातचीत कर सकता है और कई मामलों में लंबे समय तक जीवित भी रह सकता है। पुलिस इस डिजिटल साक्ष्य की भी जांच कर रही है।
जांच का केंद्र बनी FSL रिपोर्ट
अब पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी फोरेंसिक रिपोर्ट मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विसरा जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि—
- मौत का प्राथमिक कारण क्या था?
- शरीर में दवा और विष की मात्रा कितनी थी?
- क्या दोनों का संयुक्त प्रभाव जानलेवा बना?
इन्हीं सवालों के जवाब आगे की जांच और अदालत में साक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
अब आगे क्या?
फिलहाल पुलिस वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। विसरा की FSL रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह अधिक स्पष्ट हो सकेगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया और अभियोजन की दिशा भी तय होगी।
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