July 22, 2026

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डॉ. उदिता त्यागी बनीं श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर, नया संन्यासी नाम ‘प्रत्यंगिरा गिरी’

डॉ. उदिता त्यागी बनीं श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर

डॉ. उदिता त्यागी बनीं श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर

हरिद्वार/गाजियाबाद। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े ने भाजपा की पूर्व नेत्री और यति नरसिंहानंद गिरी की शिष्या डॉ. उदिता त्यागी को महामंडलेश्वर घोषित किया है। अखाड़े की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कनखल स्थित हरिहर आश्रम में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उनका संन्यासी नाम ‘महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी’ रखा गया। इसके साथ ही उन्हें श्री महाकाली पीठ हनुमत धाम, मुरादनगर का पीठाधीश्वर भी घोषित किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह निर्णय श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत स्वामी हरिगिरी जी महाराज की संस्तुति पर लिया गया। कार्यक्रम में अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत स्वामी प्रेम गिरी जी महाराज, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत स्वामी महेश पुरी जी महाराज सहित अन्य संत उपस्थित रहे। धार्मिक विधि-विधान के साथ डॉ. उदिता त्यागी के संन्यास संस्कार संपन्न कराए गए और उन्हें नया नाम प्रत्यंगिरा गिरी प्रदान किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने अभिषेक के दौरान उनसे सनातन धर्म की रक्षा और अपने गुरु के सिद्धांतों पर संघर्ष करने का आह्वान किया। विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी को श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष सनातन धर्म की रक्षा के लिए है।

विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि अभिषेक के बाद महामंडलेश्वर यति मां प्रत्यंगिरा गिरी ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी और अन्य संतों के साथ हरिद्वार स्थित माया देवी मंदिर तथा आनंद भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन किया।

प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. उदिता त्यागी के शैक्षणिक और सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि वह रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टॉपर रही हैं, दो विषयों में पीएचडी कर चुकी हैं तथा ब्यूटी कॉन्टेस्ट की विजेता भी रह चुकी हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि वह पहले भाजपा से जुड़ी थीं और बाद में विभिन्न मुद्दों पर सरकार की आलोचक के रूप में सक्रिय रहीं।

विज्ञप्ति में श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़े की ओर से इस निर्णय को सनातन परंपरा और अपने संतों के प्रति समर्थन का प्रतीक बताया गया है। वहीं, इसमें यति नरसिंहानंद गिरी और उनसे जुड़े वैचारिक संघर्षों को लेकर भी कई दावे किए गए हैं। इन दावों का आधार अखाड़े द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति है और इनका स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है।