July 26, 2026

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कंधों पर पति, दिल में भोलेनाथ की भक्ति: 180 KM पैदल चलकर पत्नी ने पेश की प्रेम और समर्पण की अद्भुत मिसाल

कंधों पर पति, दिल में भोलेनाथ की भक्ति: 180 KM पैदल चलकर पत्नी ने पेश की प्रेम और समर्पण की अद्भुत मिसाल

कंधों पर पति, दिल में भोलेनाथ की भक्ति: 180 KM पैदल चलकर पत्नी ने पेश की प्रेम और समर्पण की अद्भुत मिसाल

दूसरे साल भी दिव्यांग पति को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार पहुंचीं आशा, हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर किया जलाभिषेक

मोदीनगर/हरिद्वार। कांवड़ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और प्रेम का भी प्रतीक है। इस बार कांवड़ यात्रा में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। मोदीनगर निवासी आशा ने अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधों पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की और हरिद्वार पहुंचकर गंगाजल लिया। इसके बाद दोनों ने दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

यह दंपति लगातार दूसरे वर्ष भी इसी तरह की कठिन यात्रा पूरी कर रहा है। उनकी अटूट आस्था और एक-दूसरे के प्रति समर्पण कांवड़ यात्रा की सबसे प्रेरणादायक तस्वीर बनकर सामने आई है।

रीढ़ की चोट ने रोकी चाल, लेकिन नहीं टूटी आस्था

बताया गया कि सचिन रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी इच्छा थी कि वे स्वयं हरिद्वार जाकर गंगाजल लाएं और भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

पति की इस मनोकामना को अपना संकल्प बनाते हुए पत्नी आशा ने उन्हें विशेष आसन पर कंधों पर बैठाया और पूरे रास्ते पैदल चलकर हरिद्वार पहुंचीं। कठिन सफर, तेज धूप और थकान भी उनके संकल्प को डिगा नहीं सकी।

हरकी पैड़ी से गंगाजल, फिर दक्षेश्वर महादेव में जलाभिषेक

हरिद्वार पहुंचने के बाद दंपति ने विधि-विधान से हरकी पैड़ी से गंगाजल भरा। इसके बाद वे दक्षेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे, जहां भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना की।

श्रद्धालुओं ने कहा- यही है सच्ची शिवभक्ति

यात्रा के दौरान जहां-जहां यह दंपति पहुंचा, वहां लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। कई श्रद्धालुओं ने आशा के साहस और समर्पण को प्रणाम किया। लोगों का कहना था कि यह केवल पति-पत्नी का प्रेम नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास की जीवंत मिसाल है।

कई कांवड़ियों ने इस दंपति का स्वागत किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। सोशल मीडिया पर भी उनकी यह यात्रा तेजी से चर्चा का विषय बन रही है।

श्रावण का संदेश: प्रेम, सेवा और समर्पण ही सच्ची पूजा

श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। धर्मग्रंथों में भी सेवा, त्याग और निस्वार्थ प्रेम को सर्वोच्च धर्म बताया गया है। आशा और सचिन की यह यात्रा बताती है कि जब मन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास हो, तो कोई भी कठिनाई आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती।

यह प्रेरक कहानी हर उस व्यक्ति के लिए संदेश है कि प्रेम केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से सिद्ध होता है।

🚩 हर-हर महादेव! 🚩
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