बहसूमा (मेरठ)। सुबह का समय… खेतों में सन्नाटा… और अचानक झाड़ियों से एक खतरनाक छलांग। क्या तेंदुआ अब भी गन्ने के खेतों में छिपा है? यही सवाल शनिवार को गांव हंसापुर के हर ग्रामीण की जुबान पर था।
शनिवार सुबह खेत पर काम करने गए एक किसान पर अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया। किसान ने हिम्मत दिखाई, शोर मचाया और किसी तरह जान बचाकर गांव की ओर भाग निकला। घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में दहशत फैल गई और देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण खेतों की ओर दौड़ पड़े।
खेत में पहुंचते ही हुआ हमला, पलभर में बदल गया माहौल
गांव हंसापुर निवासी आशीष पुत्र जय सिंह शनिवार सुबह अपने खेत में खरपतवार साफ करने गया था। खेत में पहुंचते ही झाड़ियों में छिपे बैठे तेंदुए ने अचानक उस पर झपट्टा मार दिया।
अचानक हुए हमले से आशीष घबरा गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। वह शोर मचाते हुए खेत से बाहर की ओर भागा और किसी तरह गांव पहुंचकर अपनी जान बचाई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो घटना गंभीर रूप ले सकती थी।
गांव में मची अफरा-तफरी, खेत छोड़कर लौटे किसान
जैसे ही आशीष ने ग्रामीणों को पूरी घटना बताई, गांव में हड़कंप मच गया। खेतों में काम कर रहे किसान भी अपना काम छोड़कर वापस लौट आए।
ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी और तेंदुए को पकड़ने की मांग की। लोगों का कहना है कि जब तक तेंदुआ नहीं पकड़ा जाता, तब तक खेतों में जाना खतरे से खाली नहीं है।
वन विभाग ने चलाया घंटों सर्च अभियान
सूचना मिलते ही वन दरोगा अभिनव चौधरी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के गन्ने के खेतों, झाड़ियों व जंगल में कई घंटे तक सर्च अभियान चलाया।
हालांकि काफी तलाश के बाद भी तेंदुआ दिखाई नहीं दिया।
पंजों के निशान मिले, तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि
तलाशी के दौरान वन विभाग को घटनास्थल के आसपास तेंदुए के पंजों के निशान मिले।
वन दरोगा अभिनव चौधरी ने बताया कि मिले निशान तेंदुए के हैं। संभावना है कि लोगों की भीड़ और शोर के कारण वह किसी अन्य स्थान की ओर निकल गया हो। विभाग क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है।
झाड़ियों से अचानक भागा कुत्ता… कुछ पल के लिए मच गई भगदड़
सर्च अभियान के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब हर किसी की धड़कनें तेज हो गईं।
वन विभाग की टीम और ग्रामीण झाड़ियों की तलाशी ले रहे थे। तभी एक कुत्ता अचानक झाड़ियों से निकलकर तेजी से भागा। उसे देखकर कुछ लोगों को लगा कि तेंदुआ हमला करने बाहर आ गया है।
कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। कई लोग पीछे हट गए, लेकिन बाद में पता चला कि वह तेंदुआ नहीं बल्कि एक कुत्ता था। इसके बाद खोज अभियान दोबारा शुरू किया गया।
गन्ने के खेतों में छिपा है तेंदुआ?
बरसात का मौसम… ऊंचे गन्ने के खेत… घनी झाड़ियां…
ऐसे में ग्रामीणों के मन में एक ही सवाल है—क्या तेंदुआ अब भी आसपास कहीं छिपा बैठा है?
वन विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन लोगों से सतर्क रहने की अपील जरूर की है।
ग्रामीणों में डर, अब समूह बनाकर जा रहे खेत
घटना के बाद गांव हंसापुर और आसपास के इलाकों में भय का माहौल है।
किसान अब अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं। कई लोग लाठी और टॉर्च लेकर समूह में खेतों की ओर जा रहे हैं। शाम होते ही लोग जल्दी घर लौट रहे हैं।

वन विभाग की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से कहा है—
- अकेले खेत या जंगल की ओर न जाएं।
- सुबह और शाम विशेष सावधानी बरतें।
- बच्चों को अकेले खेतों की ओर न भेजें।
- तेंदुआ दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें।
- तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचना दें।
- भीड़ लगाकर घेरने की कोशिश न करें।
पहले भी मोड़कला में दिख चुका है तेंदुआ
यह पहली घटना नहीं है।
कुछ महीने पहले बहसूमा क्षेत्र के गांव मोड़कला में भी एक तेंदुआ पेड़ पर चढ़ा हुआ दिखाई दिया था। उस समय वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे सुरक्षित पकड़ लिया था और बाद में जंगल में छोड़ दिया था।
हंसापुर की ताजा घटना के बाद ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
अब आगे क्या?
वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र में निगरानी जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर कैमरा ट्रैप और अन्य संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील की गई है।
क्या तेंदुआ इलाके से निकल चुका है या अब भी गन्ने के खेतों में छिपा है? इसका जवाब वन विभाग की आगे की निगरानी और सर्च अभियान के बाद ही मिल सकेगा।
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