August 1, 2026

News Highway

जो दिखेगा, वही बताएंगे।

मनरेगा में फर्जीवाड़े का आरोप: बिना काम के कागजों में भर रही हाजिरी? कई गांवों से उठे सवाल, जांच के आदेश

मनरेगा में फर्जीवाड़े का आरोप

मनरेगा में फर्जीवाड़े का आरोप

बहसूमा (मेरठ)। बहसूमा विकासखंड के मोहम्मदपुर सकिश्त, सदरपुर, रामराज और सैफपुर-फिरोजपुर सहित कई गांवों में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कार्यों में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई स्थानों पर जमीन पर काम दिखाई नहीं देता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर भुगतान दर्शाया जा रहा है।

शिकायतकर्ता कंवरपाल और परविंद्र सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों ने मनरेगा के तहत कार्य किया ही नहीं, उनकी भी उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है। इतना ही नहीं, आरोप है कि कई मामलों में केवल फोटो लेकर मजदूरों की हाजिरी पूरी दिखा दी जाती है, जबकि मौके पर कार्य नहीं कराया जाता।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन अनियमितताओं का विरोध किया जाए या शिकायत करने की बात कही जाए तो संबंधित लोगों द्वारा कथित रूप से यह कहा जाता है कि “हमारे ऊपर तक संबंध हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से कथित फर्जीवाड़ा लगातार जारी है।

शिकायतकर्ता परविंद्र ने पूरे मामले की लिखित शिकायत खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) मनोज कुमार से की है। उनका कहना है कि उनके पास कथित फर्जी हाजिरी और भुगतान से जुड़े कई दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रशासन से बड़ा सवाल…

यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो सवाल यह उठता है कि—

  • जब कार्यस्थल पर काम नहीं हो रहा, तब मस्टर रोल में हाजिरी कैसे दर्ज हो रही है?
  • बिना वास्तविक सत्यापन के सरकारी धन का भुगतान किसके आदेश पर किया जा रहा है?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा?
  • यदि पहले भी शिकायतें हुई थीं, तो अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मनरेगा जैसी योजना ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों में विकास कार्य कराने के उद्देश्य से चलाई जाती है। यदि इस योजना में फर्जीवाड़ा हो रहा है तो यह केवल सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं, बल्कि जरूरतमंद मजदूरों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

क्या बोले बीडीओ?

खंड विकास अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि शिकायत उनके संज्ञान में आ चुकी है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता, फर्जी हाजिरी या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी संबंधित गांवों के मनरेगा कार्यों, मस्टर रोल, भुगतान रिकॉर्ड और कार्यस्थलों की भौतिक जांच कराई जाए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में पारदर्शिता बनी रहे और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।


News Highway का सवाल

क्या मनरेगा में बिना काम के हाजिरी और भुगतान का यह मामला केवल कुछ गांवों तक सीमित है, या फिर इसकी निष्पक्ष जांच पूरे विकासखंड में कराई जानी चाहिए? यदि आरोप सही साबित होते हैं तो आखिर सरकारी धन की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

— News Highway
जो दिखेगा, वही बताएंगे।

📲 लेटेस्ट और विश्वसनीय खबरों के लिए News Highway को X (Twitter), YouTube और KahoApp पर फॉलो करें।

You may have missed