July 26, 2026

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मेरठ में जगन्नाथ रथयात्रा हादसा: चौकी इंचार्ज सस्पेंड, बिजली विभाग पर अब भी कार्रवाई का इंतजार

मेरठ के परीक्षितगढ़ में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से रथ टकराया, एक की मौत, 11 घायल

मेरठ के परीक्षितगढ़ में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से रथ टकराया, एक की मौत, 11 घायल

10 मीटर भी नहीं चल पाया रथ, 11 केवी लाइन से टकराया कलश; एक श्रद्धालु की मौत, कई झुलसे

मेरठ। मेरठ में श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इलाके के चौकी इंचार्ज राजकुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि इस पूरे मामले में बिजली विभाग के अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सिर्फ 10 मीटर बाद ही हुआ हादसा

हादसा उस समय हुआ जब श्रीजगन्नाथ रथयात्रा अपने प्रारंभिक स्थल से निकली ही थी। बताया जा रहा है कि रथ करीब 10 मीटर ही आगे बढ़ा था कि उसके ऊपर लगे कलश का झंडा 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया। इसके बाद पूरे रथ में करंट दौड़ गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

इस हादसे में सचिन प्रजापति की करंट लगने से मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का इलाज अस्पताल में कराया गया।

अनुमति मिली, लेकिन सुरक्षा जांच नहीं हुई

जानकारी के अनुसार रथयात्रा के आयोजकों ने कार्यक्रम के लिए प्रशासन से विधिवत अनुमति ली थी। लेकिन अनुमति देने से पहले पुलिस और बिजली विभाग की ओर से आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी भी अधिकारी ने यह जांचने की जरूरत नहीं समझी कि जिस मार्ग से रथयात्रा निकलेगी वहां बिजली की हाईटेंशन लाइनें कितनी ऊंचाई पर हैं और रथ की कुल ऊंचाई कितनी है। यदि पहले ही स्थल निरीक्षण कर लिया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

पुलिस पर कार्रवाई, बिजली विभाग अब भी खामोश

हादसे के बाद पुलिस विभाग ने पहली कार्रवाई करते हुए संबंधित चौकी इंचार्ज राजकुमार को निलंबित कर दिया। लेकिन अब तक बिजली विभाग की ओर से किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या लाइन की निगरानी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

यह भी सवाल उठ रहा है कि जिन अधिकारियों ने रथयात्रा मार्ग का निरीक्षण किया या अनुमति प्रक्रिया में भूमिका निभाई, उनकी जिम्मेदारी आखिर तय कब होगी।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

यह हादसा प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक को उजागर करता है। धार्मिक आयोजनों में हजारों लोगों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में बिजली, पुलिस और प्रशासन के संयुक्त निरीक्षण के बिना अनुमति देना भविष्य में भी बड़े हादसों को न्योता दे सकता है।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या जांच केवल पुलिसकर्मी के निलंबन तक सीमित रहेगी या बिजली विभाग और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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