जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन: बड़े पत्रकारों की खामोशी पर उठे सवाल

नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, रिजल्ट में विसंगतियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। हजारों छात्र अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से उठ रहा है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से वायरल हो रहा है—क्या देश के बड़े टीवी पत्रकार इस मुद्दे पर खामोश हैं?

कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को लेकर देश के चर्चित पत्रकारों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कोई प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है और लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, तब मुख्यधारा की पत्रकारिता की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए।

दूसरी ओर, देशभर के कई छोटे और क्षेत्रीय पत्रकार, स्थानीय मीडिया संस्थान और डिजिटल प्लेटफॉर्म लगातार छात्रों की मांगों, प्रदर्शन और आंदोलन को प्रमुखता से दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता या विपक्ष नहीं, बल्कि जनता की आवाज को मंच देना है।

एक स्थानीय पत्रकार की भावना कुछ इस तरह सामने आई—

“हम बहुत छोटे, गली-मोहल्ले के पत्रकार ही सही, लेकिन लाखों छात्रों की आवाज़ तो उठा रहे हैं। पत्रकारिता की असली ताकत जनता के मुद्दों को सामने लाने में है।”

हालांकि, किसी भी पत्रकार या मीडिया संस्थान के सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर उनकी पूरी कवरेज का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसलिए किसी व्यक्ति विशेष की चुप्पी या सक्रियता पर अंतिम टिप्पणी करने से पहले उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है।

News Highway की अपील:
प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। इस विषय पर निष्पक्ष, तथ्यात्मक और जिम्मेदार संवाद होना लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था—दोनों के लिए आवश्यक है।

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