किसानों के लिए बड़ी खबर: अब नहीं बिकेगा पैराक्वाट डाइक्लोराइड, जानलेवा खरपतवार नाशक पर सरकार की सख्ती

नई दिल्ली। खेतों में खरपतवार (घास-फूस) साफ करने के लिए वर्षों से इस्तेमाल हो रहा पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) अब देश से विदा होने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने इस बेहद खतरनाक खरपतवार नाशक के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस रसायन पर देशभर में पूरी तरह रोक लागू हो जाएगी।

दुनिया के 70 से अधिक देशों में पहले ही इस केमिकल पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। लंबे समय से वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसे मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए भारत में इसके उपयोग पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे।

खरपतवार पर असरदार, लेकिन इंसान के लिए जानलेवा

ग्रामीण इलाकों में कई किसान फसल के बीच उगी खरपतवार को खत्म करने के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह रसायन पौधों की प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) प्रक्रिया को रोककर उन्हें कुछ ही समय में सुखा देता है। हालांकि यही केमिकल इंसानों और पशुओं के लिए भी बेहद खतरनाक माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह रसायन सांस, त्वचा या गलती से शरीर के अंदर पहुंच जाए तो इसके गंभीर और कई बार जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब तक इसका कोई प्रभावी एंटीडोट (विषरोधी दवा) उपलब्ध नहीं है।

बिना सुरक्षा के छिड़काव पड़ सकता है भारी

गांवों में अक्सर किसान बिना मास्क, दस्ताने या अन्य सुरक्षा उपकरणों के इस दवा का छिड़काव कर देते हैं। ऐसे में यह शरीर में प्रवेश कर गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसानों को हमेशा किसी भी कृषि रसायन का उपयोग करते समय सुरक्षा उपकरण पहनने की सलाह देते हैं।

शरीर में पहुंचते ही कई अंगों को पहुंचाता है नुकसान

चिकित्सकों के अनुसार पैराक्वाट शरीर में पहुंचने पर सबसे पहले फेफड़ों, गले और पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इसके बाद मुंह और गले में सूजन, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, रक्तस्राव, सांस लेने में तकलीफ और अन्य गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं। गंभीर मामलों में यह लिवर, किडनी, फेफड़ों और हृदय को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

किसानों को क्या करना चाहिए?

सरकार के इस फैसले के बाद किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे पैराक्वाट डाइक्लोराइड का उपयोग न करें और कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित सुरक्षित एवं वैकल्पिक खरपतवार प्रबंधन उपाय अपनाएं। किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग हमेशा विशेषज्ञों की सलाह और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही करें।

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