Meerut Lalita Gautam Murder Case: विवेचना से हटाई गईं CO सौम्या अस्थाना, अब नए सिरे से होगी जांच, PAC सिपाही अंकित की भूमिका पर भी उठे सवाल

मेरठ: ललिता गौतम हत्याकांड में बड़ा मोड़, जांच अधिकारी बदले, अब नए सिरे से होगी विवेचना

मेरठ के चर्चित दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मामले की विवेचना कर रहीं सीओ सौम्या अस्थाना को जांच से हटा दिया गया है। अब इस केस की जांच ब्रह्मपुरी के नए सीओ रामप्रकाश करेंगे। साथ ही, सीओ सौम्या अस्थाना के खिलाफ आंतरिक विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पीड़ित परिवार लगातार आरोप लगा रहा था कि जांच के दौरान कुछ आरोपियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

मामले में मुख्य आरोपी अंकुर चौधरी के भाई और PAC सिपाही अंकित चौधरी की भूमिका भी लगातार चर्चा में रही है। पुलिस ने उसे घटना के करीब 60 दिन बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस का कहना था कि उसके खिलाफ केवल साक्ष्य मिटाने और सूचना छिपाने से जुड़े आरोप बनते हैं। इन्हीं धाराओं में गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत से जमानत भी मिल गई थी।

पीड़ित परिवार पहले से ही अंकित चौधरी की भूमिका पर सवाल उठा रहा था। आरोप था कि उसकी संलिप्तता केवल साक्ष्य मिटाने तक सीमित नहीं है। बाद में मेरठ में हुए दलित प्रदर्शन और उस दौरान हुए लाठीचार्ज के बाद एडीजी स्तर पर मामले की समीक्षा के आदेश दिए गए। इसके बाद जांच में अंकित की कथित भूमिका को लेकर नए पहलुओं की पड़ताल शुरू हुई।

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पुलिस अब यह भी देख रही है कि घटना से पहले, घटना के दौरान और उसके बाद अंकित की लोकेशन क्या थी। यह भी जांच का हिस्सा है कि उसने ड्यूटी से छुट्टी लेने के लिए जो कारण बताया था, उसकी वास्तविकता क्या थी। पुलिस के अनुसार, इस पहलू की भी जांच की गई है।

पीड़ित परिवार लगातार यह मांग करता रहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी आरोपी को संरक्षण न मिले। इसी बीच विवेचना अधिकारी बदले जाने और विभागीय जांच शुरू होने से इस केस ने नया मोड़ ले लिया है।


अब आगे क्या?

अब नए विवेचना अधिकारी सीओ रामप्रकाश पूरे मामले की फाइल का अध्ययन करेंगे और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करेंगे। साथ ही, सीओ सौम्या अस्थाना के खिलाफ शुरू हुई विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि विवेचना के दौरान किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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