हस्तिनापुर में बना ‘चरक औषधि वन’, महर्षि चरक के नाम पर लगाए गए औषधीय पौधे, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

हस्तिनापुर।

पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की दिशा में गुरुवार को हस्तिनापुर में एक अहम पहल देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में चल रहे ‘एक वृक्ष मां के नाम’ अभियान के तहत ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर के मनोहरपुर कॉलोनी के निकट महर्षि चरक के नाम पर ‘चरक औषधि वन’ के लिए पौधारोपण किया गया।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश सरकार के वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें वन विभाग और कृषि प्रक्षेत्र के अधिकारियों ने सामूहिक रूप से पौधे लगाए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हस्तिनापुर के इतिहास के शोध एवं संकलन से जुड़े प्रख्यात शिक्षाविद् सुनील पोसवाल रहे। उनके साथ राजकीय एवं कृषि प्रक्षेत्र प्रबंधक अर्जुन सिंह, वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय तथा वन विभाग और कृषि प्रक्षेत्र के कर्मचारियों ने पौधारोपण किया।

इस दौरान विभिन्न औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इनमें अशोक, अर्जुन, बहेड़ा, हरड़, पीपल, पिलखन, बरगद, कनकचंपा, कचनार और आंवला सहित कई महत्वपूर्ण पौधे शामिल रहे।

मुख्य अतिथि सुनील पोसवाल ने कहा कि महर्षि चरक को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद मानव शरीर में वात, पित्त और कफ के संतुलन पर आधारित चिकित्सा पद्धति है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने में सहायक मानी जाती है। उनका कहना था कि वनस्पतियों के बिना आयुर्वेद की कल्पना अधूरी है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण को भी अपना नैतिक दायित्व समझना चाहिए।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने भी पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया। उनका कहना था कि इस प्रकार के औषधीय वन भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं और हरित वातावरण को बढ़ावा देंगे।


अब आगे क्या?

वन विभाग की ओर से लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भविष्य में चरक औषधि वन एक विकसित हरित क्षेत्र के रूप में तैयार हो सके और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को मजबूती मिले।

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