“जिसका जितना दोष, उसे उतनी ही सजा”, संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने ललिता गौतम हत्याकांड, गंगानगर हिंसा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सरकार को घेरा
मेरठ।
संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए ललिता गौतम हत्याकांड, कलेक्ट्रेट प्रदर्शन के बाद हुई पुलिस कार्रवाई, गंगानगर में मिठाई विवाद में हुई मारपीट और गुर्जर समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। परिसंघ ने कहा कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
“न्याय सिर्फ होना नहीं, दिखाई भी देना चाहिए”
परिसंघ ने कहा कि ललिता गौतम हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की भी परीक्षा है। संगठन ने प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए कहा कि पीड़ित परिवार की आशंकाओं को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। संगठन की मांग है कि जांच की गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाएं, ताकि न कोई दोषी बच सके और न कोई निर्दोष कार्रवाई का शिकार बने।
कलेक्ट्रेट प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमों पर उठाए सवाल
प्रेस बयान में कलेक्ट्रेट पर हुए धरना-प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमों का भी जिक्र किया गया। परिसंघ का कहना है कि गिरफ्तार किए गए दिग्विजय भाटी का दावा है कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे और उपलब्ध फोटो एवं वीडियो में भी उनकी मौजूदगी दिखाई नहीं देती। यदि ऐसा है, तो उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना निष्पक्ष जांच के सवाल खड़े करता है।
संगठन ने मांग की कि जिन लोगों की संलिप्तता जांच में प्रमाणित नहीं होती, उन्हें तत्काल राहत दी जाए और प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी उसकी वास्तविक भूमिका के आधार पर तय की जाए।
“धरना-प्रदर्शन लोकतंत्र का अधिकार”
संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने कहा कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल न्याय की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल हुआ है, तो उसे अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन ने हेमंत प्रधान सहित अन्य लोगों के मामलों में भी निष्पक्ष जांच और भूमिका के अनुरूप कार्रवाई की मांग दोहराई।
गंगानगर मिठाई विवाद की कड़ी निंदा
परिसंघ ने गंगानगर क्षेत्र में कथित तौर पर 200 ग्राम मिठाई कम देने के विवाद में हुई हिंसा की भी कड़ी निंदा की। संगठन ने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए, न कि हिंसा और दबंगई के जरिए। प्रशासन से मांग की गई कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी रखी मांग
संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश संगठन में गुर्जर समाज को मंत्री पद और क्षेत्रीय अध्यक्ष जैसे दायित्व दिए जाने का स्वागत किया। हालांकि संगठन ने कहा कि समाज की राजनीतिक भागीदारी अभी भी अधूरी है।
परिसंघ ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार में गुर्जर समाज को कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रतिनिधित्व देने, साथ ही निगमों, बोर्डों, आयोगों और विभिन्न जिला एवं प्रदेश स्तरीय समितियों में जनसंख्या और योगदान के अनुरूप सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
नवंबर में हो सकता है प्रदेश स्तरीय चिंतन शिविर
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी राजनीतिक मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी नवंबर माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों का संयुक्त चिंतन शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें समाज की राजनीतिक दिशा, रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना पर व्यापक चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
संयुक्त गुर्जर परिसंघ ने अंत में कहा कि उसका उद्देश्य न्याय, सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और समाज के सम्मानजनक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से कार्य करना है।
