July 14, 2026

मरने के डर से अनशन नहीं तोड़े जाते: सोनम वांगचुक के अनशन पर एक विचार

सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक

मरने के डर से अनशन नहीं तोड़े जाते। ✍️ सत्यम त्यागी

ये गुणा भाग। अनशनकर्ता को पहले करने चाहिए। उम्मीद है आपने भी करी होंगी। आप डटे रहिये सोनम जी!

आज सुबह से ही सोशल मीडिया पर लोग सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की ‘ गुहार ‘ लगा रहे है। लोग तमाम तरह के तर्क देकर, सरकार को बेरहम, कठोर बताकर सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाना चाहते है। क्या? अभी तक उन्होंने अपनी अनशन की अगली योजनाए सार्वजनिक करी है। क्या? वो खूद अनशन तोड़ना चाहते है। इन सब प्रश्नों का जवाब उन्ही के पास है।

सोनम वाँगचुक वर्तमान सरकार के कई मुद्दों पर सहयोगी रहे है। वो इस सरकार की बेशर्मी को बेहतर जानते है। उन्होने जरूर अंदाजा लगाया होगा, भूख से अगर उनकी जान पर बन आई फिर उन्हें कंटिन्यू करना है या छोड़ देना है। वो भी नहीं चाहते होंगे बगैर किसी हल के ( यहाँ तो अभी बातचीत भी नहीं हुई ) इसे रोका जाये। भूख हड़तालो का देश मे एक इतिहास रहा है और इसके लीडर रहे ” महात्मा गाँधी ” मुझें याद नहीं आता गाँधी नें इस मोड़ पर अपनी किसी हड़ताल को रोका हो। आप उसी लेगेसी के मोर्चे पर है। इसे इस मोड़ पर छोड़ना गलत है।

ऐसा भी नहीं इससे पहले किसी की मृत्यु इन हड़तालो से नहीं हुई हो – और ऐसा भी नहीं इससे सब चीजें सामान्य हो गई हो।

मगर, फिर भी अनशन एक प्रतीकात्मक विरोध है बहरी सत्ताओ के कानो मे गूंजने के लिए। उम्मीद है आप उनके कानो मे गूंजे बिना या कम स कम (जूँ) रेंगे बिना इसे अधूरा नहीं छोड़ेंगे!

‘ क्योंकि ‘ मरने के डर से अनशन नहीं तोड़े जाते!!

लेखक
सत्यम त्यागी

(लेखक सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर स्वतंत्र विचार लिखते हैं।)

अस्वीकरण: यह लेख लेखक सत्यम त्यागी के निजी विचार हैं। News Highway इस लेख में व्यक्त विचारों से आवश्यक नहीं कि सहमत हो। इस लेख का उद्देश्य लेखक की राय को प्रकाशित करना है।

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