बड़ी उम्मीदें थी इस शहर को अपने लाड़ले मंत्री से.. Meerut
मंत्री असीम अरूण
Meerut : उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 जून-2026 को मंत्री असीम अरूण को मेरठ का जिला प्रभारी बनाया है. शानदार पुलिस अफसर रहे असीम अरूण के पिता और वह खुद मेरठ में तैनात रहे है. असीम अरूण का बचपन और कैरियर की शुरूआत मेरठ से हुई. वह बीजेपी का दलित फेस है. बेहद सुलझे हुए नेता.. बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उनके जरिये दलित वोटबैंक का रास्ता खोज रही थी.
मगर सिर मुंडाते ही ओले पड़ गये. असीम अरूण 4 जून को मेरठ में आये और दलितों को उनके अधिकार, न्याय और इंसाफ के लिए बीजेपी में विश्वास करने का आह्वान किया. 8 जुलाई को कलैक्ट्रेट गेट के सामने जाम सड़क पर पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ अखिलेश यादव, चन्द्रशेखर, संजय सिंह, मायावती सबने आवाज बुलंद की मगर असीम अरूण नही बोले.
8 जुलाई को मेरठ में जब दलित प्रदर्शनकारी ललिता गौतम के परिवार से साथ कलैक्ट्रेट गेट के सामने धरने पर बैठे थे, असीम अरूण ने कन्नौज में “एक पेड़ मां के नाम” की वीडियो अपने X हैंडल पर पोस्ट किया. दलितों पर लाठीचार्ज के बाद उन्होने माफिया-मुक्त कन्नौज वाली अखबारी खबर पोस्ट की.
9 जुलाई को कन्नौज में जनसुनवाई से लेकर AVBP के स्थापना दिवस तक की शुभकामनाओं के तमाम पोस्ट उनके X पर है.
10 जुलाई को उन्होने राजनाथ सिंह को जन्मदिन की शुभकामनाऐं दी. एक होटल का फीता काटा. कृषि तकनीकों के बढ़ावा देने के कार्यक्रम में चीफ गेस्ट रहे. कई गांवों में कार्यक्रम किये. असीम अरूण के इस कार्यक्रमों के दौरान मेरठ में चन्द्रशेखर दलित समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार का दर्द सुनकर अपनी राजनीति चमका रहे थे.
मगर उन्हें मेरठ के दलितों की याद नही आयी. पुलिस की तरह उन्होने दलित प्रदर्शनकारियों को ना तो अपराधी बताया और ना ही उनके इंसाफ के हक में कोई बात अपने X पर लिखी. उन्होने कोई वीडियो भी जारी नही किया.
अभी फिर से मैने उनका X हैंडल देखा, वह जब राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा से कन्नौज में मुलाकात कर रहे थे, अखिलेश यादव मृतक छात्रा ललिता गौतम के परिवार के दिल्ली एयरपोर्ट पर आंसू पौछ रहे थे. असीम अरूण तब भी कन्नौज में है.
मेरठ के दलित जिन्हें अपना रहनुमा समझ बैठे थे उनके मुंह से उनके दुख-दर्द के लिए एक शब्द नही निकला. यह बेबसी है. या फिर माना जाये यही सरकार की पॉलिसी है.
बड़ी उम्मीदें थी इस शहर को अपने लाड़ले मंत्री से..
मेरठ के जिला प्रभारी मंत्री बनाए जाने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि संवेदनशील घटनाओं पर उनकी सक्रिय भूमिका दिखाई देगी। लेकिन हाल की घटनाओं के दौरान उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिला प्रभारी मंत्री को ऐसे मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए?
