नोएडा। नोएडा में युवराज मेहता की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक हादसा था या फिर सिस्टम की लापरवाही से हुई मौत, इस सवाल ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। युवराज के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी मौत है, जिसे समय रहते रोका जा सकता था।
परिजनों के मुताबिक, युवराज की कार पानी में गिरने के बाद वह करीब दो घंटे तक मदद के लिए चीखता रहा, लेकिन सिस्टम का कोई गोताखोर मौके पर नहीं उतरा। आरोप है कि प्रशासनिक मशीनरी तमाशबीन बनी रही। जब कोई अधिकारी आगे नहीं आया, तब एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी जान जोखिम में डालते हुए कमर में रस्सी बांधी और करीब 50 मीटर अंदर तक पानी में गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मौके पर मौजूद अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाते नजर आए। युवराज के पिता के सामने उनका बेटा मदद की गुहार लगाता रहा और सिस्टम चुपचाप देखता रहा—यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है।
घटना के बाद जब पत्रकारों ने जवाबदेही तय करने के लिए सवाल पूछे, तो प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी और दूरी भी चर्चा का विषय बन गई। आरोप है कि VIP प्रोटोकॉल और अफसरशाही आम नागरिक की जान से ऊपर रखी जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि युवराज की कार को बाहर निकालने में चार दिन क्यों लगे?
और अगर यह सिर्फ हादसा था, तो अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
परिजनों का कहना है कि जब तक इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं दिखती। प्रदेश सरकार और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर अब जनता भी सवाल पूछ रही है।
यह मामला अब सिर्फ एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उस सिस्टम पर सवाल है, जो दावा तो बहुत करता है, लेकिन संकट के वक्त नागरिकों को अकेला छोड़ देता है।
