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विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: भीकुंड वेटलैंड में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण और कछुआ पुनर्वास कार्यक्रम का आयोजन

हस्तिनापुर | मेरठ (News Highway)
विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड) दिवस के अवसर पर 02 फरवरी 2026 को हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण की हस्तिनापुर रेंज अंतर्गत भीकुंड वेटलैंड में पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भीकुंड वेटलैंड स्थित वॉच टावर परिसर में किया गया, जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की महत्ता तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जनमानस को जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में प्रभागीय निदेशक (डीएफओ) वंदना फोगाट, भाजपा मेरठ जिला मंत्री एवं ‘मन की बात’ के जिला प्रभारी, शिक्षाविद् सुनील पोसवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती, वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय, ऑर्निथोलॉजिस्ट डॉ. रजत भार्गव, हरिमोहन मीणा (WWF) सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि एवं विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बर्ड वॉचिंग एवं जैव विविधता जागरूकता कार्यक्रम

कार्यक्रम का शुभारंभ भीकुंड वॉच टावर से बर्ड वॉचिंग गतिविधि के साथ हुआ। इस दौरान प्रतिभागियों ने प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की अनेक प्रजातियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों द्वारा पक्षियों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास तथा आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिकी में उनकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी गई।

बताया गया कि भीकुंड वेटलैंड यूरेशिया देशों से आने वाले हजारों किलोमीटर दूर के प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। इस वर्ष यहां अब तक का सबसे बड़ा बर्ड काउंट दर्ज किया गया, जिसमें 30 हजार से अधिक प्रवासी पक्षी देखे गए। यह क्षेत्र 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास माना जाता है।

प्रमुख रूप से देखी गई प्रजातियों में बार हेडेड गूस, लिटिल कॉर्मोरेंट, ब्राह्मणी, एग्रेट, किंगफिशर, ग्रे लेग गूस, सरस क्रेन और स्पून बिल्ड डक शामिल रहीं।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को रामसर साइट्स के महत्व की जानकारी दी गई तथा प्रतिभागियों द्वारा भीकुंड वेटलैंड को रामसर साइट घोषित करने की मांग भी रखी गई।

गंगा नदी में 1633 कछुआ शावकों का पुनर्वास

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में मखदुमपुर घाट स्थित मखदुमपुर टर्टल हैचरी में हैच किए गए कुल 1633 कछुआ शावकों को गंगा नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। यह पहल गंगा नदी के जैविक संतुलन को बनाए रखने एवं विलुप्तप्राय कछुआ प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 पर हस्तिनापुर के भीकुंड वेटलैंड में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण और गंगा नदी में 1633 कछुआ शावकों के पुनर्वास का आयोजन किया गया।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 पर हस्तिनापुर के भीकुंड वेटलैंड में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण और गंगा नदी में 1633 कछुआ शावकों के पुनर्वास का आयोजन किया गया।

प्रजाति अनुसार छोड़े गए शावक:

  • Batagur dhongoka – 41
  • Pangshura smithii – 944
  • Pangshura tentoria – 648
    कुल – 1633 शावक

विशेषज्ञों ने बताया कि कछुए गंगा के पारिस्थितिक तंत्र में प्राकृतिक स्कैवेंजर की भूमिका निभाते हैं, जिससे नदी की स्वच्छता एवं जैव संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

चित्रकला प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोह

वेटलैंड दिवस के अवसर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

  • सीनियर विंग में स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की मिशिका त्यागी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • जूनियर विंग में हस्तिनापुर पब्लिक स्कूल के रित्विक को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
    इसके अतिरिक्त 10 विद्यार्थियों को द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में बर्ड आइडेंटिफिकेशन एवं फोटोग्राफी में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. रजत भार्गव को सम्मानित किया गया। वहीं विशिष्ट अतिथि सुनील पोसवाल को उनकी कविता “आओ चले हस्तिनापुर की ओर” तथा महाभारतकालीन हस्तिनापुर, बूढ़ी गंगा पुनरोद्धार एवं शैक्षणिक योगदान के लिए विशेष सम्मान दिया गया।

डॉ. रजत भार्गव द्वारा आयोजित पक्षी प्रश्नोत्तरी में भाग लेने पर शोभित विश्वविद्यालय के पांच विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।

टर्टल हैचरी भ्रमण

कार्यक्रम के अंतिम चरण में अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने टर्टल हैचरी का भ्रमण किया, जहां कछुओं के संरक्षण, अंडों के सुरक्षित ऊष्मायन एवं शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई।

संदेश

अपने संबोधन में वक्ताओं ने आर्द्रभूमियों को प्रकृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रम समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यह कार्यक्रम वन विभाग, WWF एवं स्थानीय प्रशासन के समन्वय से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और जनसामान्य को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने में प्रभावी सिद्ध हुआ।

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