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विनायक विद्यापीठ में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, भविष्य के कौशल पर हुआ मंथन

विनायक विद्यापीठ में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, भविष्य के कौशल पर हुआ मंथन

विनायक विद्यापीठ में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, भविष्य के कौशल पर हुआ मंथन

मेरठ, मोदीपुरम।
विनायक विद्यापीठ, मोदीपुरम में ह्यूमैनिटीज एंड शिक्षा विभाग द्वारा “फ्यूचर स्किल्स फॉर एंप्लॉयबिलिटी: ब्लेंडिंग टेक्निकल नॉलेज विथ सॉफ्ट स्किल्स” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कौशल विकास के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर सुरक्षा पाल, विभागाध्यक्ष एवं डीन, शिक्षा विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ उपस्थित रहे। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर मंजू गुप्ता, निदेशक आईकोड सेंटर, प्रॉस्पर टेस्ट्स, यूएसए, डॉ. विनय प्रकाश सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, जनता डिग्री कॉलेज पतला, गाजियाबाद तथा डॉ. कविता अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, टीचर एजुकेशन, डीजे कॉलेज बड़ौत ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा रिबन काटकर और मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। सभी अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या एवं रुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एकेडमिक निदेशिका डॉ. अनुप्रीता शर्मा ने बुके देकर किया।

इस अवसर पर निदेशक इंजी. विकास कुमार, टीपीओ प्रवीन शर्मा, सभी विभागाध्यक्ष, फैकल्टी मेंबर्स एवं विद्यार्थीगण भी उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में छात्र पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो गए हैं। अब केवल डिग्री प्राप्त करना ही लक्ष्य नहीं रह गया है, बल्कि कौशल विकास भी उतना ही आवश्यक हो गया है। कुछ छात्र स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो कुछ सिविल सेवा या तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। भविष्य की योजनाओं में नवाचार, रोजगारपरक शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

संगोष्ठी के अंतर्गत पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतियोगिता में हिमांशु को प्रथम स्थान, पूजा को द्वितीय स्थान तथा उर्वसी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। सभी विजेताओं को महाविद्यालय की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

प्राचार्या डॉ. अनुप्रीता शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि आज अक्सर लोग बेरोजगारी की चर्चा करते हैं, जबकि नौकरियां उपलब्ध हैं, लेकिन कई छात्र उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल नहीं होने के कारण उन्हें प्राप्त नहीं कर पाते। इस स्थिति को कौशल अंतर (स्किल गैप) कहा जाता है। उन्होंने बताया कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप इस अंतर को कम करने के लिए विनायक विद्यापीठ निरंतर प्रयास कर रहा है।

वहीं निदेशक इंजी. विकास कुमार ने कहा कि आज के दौर में सॉफ्ट स्किल्स भी तकनीकी कौशल जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं। विनायक विद्यापीठ दोनों प्रकार के कौशल पर ध्यान केंद्रित कर छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है, ताकि उन्हें रोजगार प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

बीएड विभागाध्यक्ष एकता सिंधु ने संगोष्ठी के विषय और उद्देश्य पर विस्तार से जानकारी दी, जबकि डीएवी विभाग की सहायक प्रोफेसर रीमा विकल ने एब्स्ट्रैक्ट के बारे में जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं को महाविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। बीए विभागाध्यक्ष सीमा चौधरी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन मैनेजमेंट विभाग के सहायक प्रोफेसर सुनील कुमार द्वारा किया गया।

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