टिकौला शुगर मिल में किसान गोष्ठी: ‘चार सूत्र’ अपनाएं, 25% तक बढ़ेगा गन्ना उत्पादन |
टिकौला शुगर मिल में किसान गोष्ठी
मेरठ/बहसूमा। क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ाने और गन्ना उत्पादन में सुधार के उद्देश्य से टिकौला शुगर मिल परिसर में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए “उत्तम खेती के चार आधार” पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य अतिथि उप गन्ना आयुक्त सहारनपुर ओमप्रकाश सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमांशु कुमार ने की। इस अवसर पर ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक मुलायम सिंह यादव, सचिव संजय सिंह (रामराज) सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
15–25% तक उत्पादन बढ़ाने का दावा
गोष्ठी में मिल प्रबंधन ने इस वर्ष उत्पादन बढ़ाने के लिए चार मुख्य बिंदुओं—
- किस्म बदलाव
- फसल सुरक्षा
- बीज उपचार
- मृदा उपचार
—पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि यदि किसान इन चार सूत्रों को अपनाते हैं तो गन्ना उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
पुरानी किस्म 0238 से दूरी बनाने की सलाह
बैठक में बताया गया कि पुरानी किस्मों, खासकर 0238 में रोग और कीट प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में किसानों को नई उन्नत किस्में अपनाने की सलाह दी गई। मिल प्रबंधन द्वारा को० 0118, 15023, 13235, 18231, 14201 और 16202 जैसी उन्नत किस्मों पर ₹20 से ₹100 प्रति क्विंटल तक अनुदान दिया जा रहा है।
संदेश साफ था—“किस्म बदलेगी, तभी आय बढ़ेगी।”
बीज उपचार और मशीनीकरण पर जोर
अधिकारियों ने बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए बीज उपचार पहला कदम है। कार्बेन्डाजिम और इमिडाक्लोप्रिड दवाएं अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए ट्रेंच प्लांटर की खरीद पर अनुदान और रैटून मैनेजमेंट डिवाइस पर 15% सहायता देने की घोषणा की गई। इससे किसानों को समय और लागत दोनों में बचत होगी।
फसल सुरक्षा के लिए अनुदान
फसल को कीटों से बचाने के लिए फेरोमोन और लाइट ट्रैप 25% अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं CTPR सहित अन्य कीटनाशक 15% अनुदान पर दिए जाएंगे। टॉप बोरर नियंत्रण के लिए क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई।
प्रगतिशील किसानों की भागीदारी
गोष्ठी में डॉ. वेद प्रकाश, मोहनलाल शर्मा सहित क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान—ध्यान सिंह, रामपाल सिंह, कटार सिंह, अरविंद सिंह, प्रवेश अनुज, बलवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाने और नई किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती करने का आह्वान किया गया।