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मेरठ में बेटियां फाउंडेशन ने आयोजित की “सुखी दांपत्य – खुशहाल परिवार” कार्यशाला, परिवारिक विवादों में कमी लाने पर जोर

मेरठ में बेटियां फाउंडेशन ने आयोजित की “सुखी दांपत्य – खुशहाल परिवार” कार्यशाला, परिवारिक विवादों में कमी लाने पर जोर

मेरठ में बेटियां फाउंडेशन ने आयोजित की “सुखी दांपत्य – खुशहाल परिवार” कार्यशाला, परिवारिक विवादों में कमी लाने पर जोर

बेटियां फाउंडेशन मेरठ ने “सुखी दांपत्य – खुशहाल परिवार” विषय पर कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में पति-पत्नी के बीच संवाद, विश्वास और जिम्मेदारी साझा करने के तरीके बताये गए। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा कर परिवारिक जीवन खुशहाल बनाने का संकल्प लिया।

मेरठ: बेटियां फाउंडेशन मेरठ द्वारा आज “सुखी दांपत्य – खुशहाल परिवार” विषय पर एक विशेष परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पति-पत्नी के बीच संवाद, विश्वास और आपसी सम्मान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय महिला आयोग के तेरे मेरे सपने सेंटर की काउंसलर कुसुम शर्मा ने बताया कि स्वस्थ संवाद, जिम्मेदारी की साझेदारी और पारदर्शिता परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने के प्रमुख सूत्र हैं। उन्होंने कहा कि दांपत्य जीवन में संवाद और सुनना, सम्मान और विश्वास, गुस्से पर नियंत्रण, आर्थिक पारदर्शिता, परिवार और सीमाएं, जिम्मेदारी की साझेदारी, समय और स्नेह जैसे तत्वों पर ध्यान देने से परिवार खुशहाल बना रहता है।

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और सुखद पारिवारिक जीवन के लिए संकल्प लिया। संस्था अध्यक्ष अंजु पाण्डेय ने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और आने वाली पीढ़ियों का आधार होता है। उन्होंने कहा कि रिश्ता तभी मजबूत होता है, जब संवाद, सम्मान और विश्वास कायम हों।

इस कार्यशाला में दंपतियों ने आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। समूह द्वारा हुई चर्चा में यह पता चला कि परिवार में झगड़े की सबसे बड़ी वजह क्या होती है और समाधान के लिए पहला कदम क्या होना चाहिए। इस कार्यक्रम में अमिता अरोड़ा, कुसुम मित्तल, सचिव शिवकुमारी गुप्ता, विनीता तिवारी, सुधा अरोड़ा, लक्ष्मी बिंदल, नीरा गुप्ता, मंजुला शर्मा और बबीता कटारिया सहित कई महिलाओं का सहयोग रहा।

बेटियां फाउंडेशन का मानना है कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज की नींव है, और इस प्रकार की कार्यशालाओं से परिवारिक जीवन में सुधार लाना संभव है।

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