सीमा आनंद और शुभंकर मिश्रा पर सोशल मीडिया में बहस

पॉडकास्ट में निजी संबंधों पर चर्चा से मचा बवाल, सीमा आनंद और शुभंकर मिश्रा पर सोशल मीडिया में बहस | Seema Anand

65 वर्ष से अधिक उम्र की महिला सीमा आनंद (Seema Anand) द्वारा एक पॉडकास्ट में खुले मंच से यौन विषयों और निजी संबंधों से जुड़े मुद्दों पर की गई चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ ही घंटों में यह मुद्दा सोशल मीडिया के केंद्र में आ गया और ट्विटर (एक्स), फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर बहस छिड़ गई। बड़ी संख्या में लोग इस बातचीत को सार्वजनिक मंचों की मर्यादा के खिलाफ बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग इसे व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति और आधुनिक सोच से जोड़कर देख रहे हैं।

यह पूरा विवाद चर्चित यूट्यूबर शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट से जुड़ा है, जिसमें सीमा आनंद को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। बातचीत के दौरान सीमा आनंद ने बताया कि पिछले वर्ष एक 15 वर्षीय किशोर ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया था। इस घटना का उल्लेख उन्होंने बातचीत के दौरान सहज और हल्के अंदाज़ में किया, जो कई लोगों को असहज कर गया। इसके बाद शुभंकर मिश्रा द्वारा उनकी उम्र पूछे जाने पर सीमा आनंद ने बताया कि वह 65 वर्ष की हैं। बातचीत के ये अंश सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज़ हो गईं और इसे लेकर आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

सीमा आनंद खुद को यौन शिक्षा से जुड़ी सलाहकार बताती हैं और उनका पूरा कार्यक्षेत्र इसी विषय के आसपास केंद्रित है। वह अपनी किताबों, इंटरव्यू, सेमिनार और पॉडकास्ट के माध्यम से दांपत्य जीवन, निजी रिश्तों, भावनात्मक जुड़ाव और शारीरिक समझ से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखती हैं। सीमा आनंद का मानना है कि समाज में इन विषयों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए और जीवन का मुख्य उद्देश्य मानसिक संतुलन और खुशी प्राप्त करना है। उनके अनुसार व्यक्ति को अपनी सोच और जीवनशैली को लेकर खुलापन रखना चाहिए।

हालांकि, उनके विचारों और प्रस्तुति के तरीके को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध भी देखने को मिल रहा है। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विषयों को सार्वजनिक डिजिटल मंचों पर किस भाषा और किस संदर्भ में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, इस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है। खासकर तब, जब दर्शकों में हर आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं।

इस विवाद के बाद यूट्यूबर शुभंकर मिश्रा के कंटेंट को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि हाल के समय में उनके पॉडकास्ट में निजी रिश्तों, विवादित टिप्पणियों और सनसनीखेज विषयों को अपेक्षाकृत अधिक स्थान दिया जा रहा है, जबकि शिक्षा, सामाजिक सरोकार, रोजगार, ग्रामीण समस्याएं और ज़मीनी हकीकत जैसे मुद्दे कम दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने यह भी टिप्पणी की कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय कंटेंट क्रिएटर्स की सामाजिक जिम्मेदारी कहीं अधिक बढ़ जाती है।

कई लोगों का मानना है कि पॉडकास्ट जैसे प्रभावशाली माध्यम का उपयोग समाज को जागरूक करने, सकारात्मक संवाद बढ़ाने और सार्थक विषयों पर चर्चा के लिए किया जाना चाहिए। वहीं कुछ यूज़र्स इसे दर्शकों की रुचि और कंटेंट की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। इसी कारण यह मुद्दा अब केवल एक व्यक्ति या पॉडकास्ट तक सीमित नहीं रह गया है।

फिलहाल यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक मर्यादा की बड़ी बहस का रूप ले चुका है। सीमा आनंद के बयान और शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल दौर में सार्वजनिक मंचों पर किस तरह के विषयों को किस सीमा तक प्रस्तुत किया जाना चाहिए और कंटेंट क्रिएटर्स की सामाजिक भूमिका क्या होनी चाहिए।