मेरठ के रामराज में सकल हिंदू समाज द्वारा विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

रामराज में विराट हिंदू सम्मेलन, RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संस्कृति और गौरवशाली इतिहास पर मंथन

बहसूमा। मंगलवार को रामराज कस्बे में मेरठ–बिजनौर मार्ग स्थित रामलीला मैदान में सकल हिंदू समाज द्वारा एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत हवन-पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात हिंदू संस्कृति, संस्कारों और भारत के गौरवशाली इतिहास पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया, ताकि राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सके।

कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग सामाजिक समरसता संयोजक सुरेश कुमार, संत शाश्वतांनंद महाराज एवं मास्टर धनेश बंसल द्वारा भारत माता की आरती के साथ किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता मास्टर धनेश बंसल ने की, जबकि संचालन अंकुश शर्मा ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में संत शाश्वतांनंद महाराज उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में संत शाश्वतांनंद महाराज ने समरसता का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व में केवल भारत को ही मां का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए शबरी के बेर और जटायु के अंतिम संस्कार को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देश की गुलामी के कारणों पर गंभीर चिंतन किया था। साथ ही उन्होंने भगवान राम, श्रीकृष्ण, देवी सरस्वती और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने भारत को अक्षुण्ण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संत शाश्वतांनंद महाराज ने श्रीराम मंदिर निर्माण को हिंदू समाज की ऐतिहासिक विजय बताया और कहा कि भारतीय संस्कृति की योग परंपरा को आज पूरा विश्व अपना रहा है।

उन्होंने वर्तमान समय में हिंदू समाज के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने लव जिहाद को पहली बड़ी चुनौती बताते हुए जनजागरण की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही कश्मीर की घटनाओं, लैंड जिहाद, घुसपैठ, धर्मांतरण और जनसंख्या असंतुलन को भी गंभीर समस्याएं बताया।

कार्यक्रम के अंत में मां भारती की आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। संत शाश्वतांनंद महाराज ने भारत भूमि पर जन्म को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि हमारे पास प्रभु श्रीराम की मर्यादा, श्रीकृष्ण की कूटनीति, स्वामी दयानंद की क्रांति और भगवान बुद्ध व महावीर के शांति संदेश की अमूल्य विरासत है। उन्होंने सनातन हिंदू धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन और व्यापक धर्म बताया।

इस अवसर पर रामराज खंड के माननीय खंड संघचालक मास्टर ब्रह्मचारी, डॉ. श्रीपाल कोहली, विपिन मनचंदा, केपी धीमान, सुदर्शन गोयल, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, पंडित विधि चंद शर्मा, विजय तोमर, अजय तोमर, विशाल राठी, सचिन बैंसला सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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