ऑनलाइन गेम की लत बच्चों के लिए घातक, सिटीजन वॉइस बैठक में नोएडा घटना पर गंभीर चिंता | मेरठ न्यूज़

ऑनलाइन गेम की लत बच्चों के मानसिक व सामाजिक विकास के लिए घातक: सिटीजन वॉइस बैठक में गंभीर मंथन

मेरठ। सिटीजन वॉइस की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन आज पीएल शर्मा रोड स्थित लर्निंग सेंटर, यूको बैंक के सामने किया गया। बैठक का मुख्य विषय “बच्चों के बौद्धिक और सामाजिक विकास में ऑनलाइन गेम की लत कितनी नुकसानदायक है” रहा, जिस पर वक्ताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की।

बैठक का संचालन करते हुए सिटीजन वॉइस के अध्यक्ष प्रशान्त कौशिक ने हाल ही में नोएडा में हुई एक हृदयविदारक घटना का उल्लेख किया, जिसमें ऑनलाइन गेम खेलने पर रोक लगाने से आहत होकर एक परिवार की तीन बेटियों ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ऑनलाइन गेमिंग किस हद तक बच्चों की मानसिकता को नियंत्रित कर रही है और यह विषय अत्यंत गंभीर है।

बैठक में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इंटरनेट और ऑनलाइन तकनीक के इस युग में बच्चों के साथ-साथ बड़ों पर भी इसका गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है। आधुनिक जीवनशैली में इंटरनेट इस कदर घुल-मिल गया है कि इससे पूरी तरह अलग रहना संभव नहीं, लेकिन इसके उपयोग में संतुलन और समझ बेहद जरूरी है।

वक्ताओं ने कहा कि इंटरनेट को लेकर यह आम धारणा है कि इसके दुरुपयोग के खतरे अधिक हैं, लेकिन इसके समाधान के लिए अभिभावकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार और संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि वे अपनी समस्याएं और भावनाएं खुलकर साझा कर सकें।

सामाजिक बदलाव पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने समाज की सोच और व्यवहार दोनों को तेजी से बदला है। ऑनलाइन गेमिंग जहां एक बड़े उद्योग के रूप में उभर रहा है, वहीं बच्चों में इसकी लत इसके दुष्प्रभावों को भी उजागर कर रही है। हालांकि हर तकनीक के दो पहलू होते हैं।

बैठक में यह भी कहा गया कि वीडियो और रील क्रिएशन के माध्यम से जहां कई लोग आर्थिक लाभ कमा रहे हैं, वहीं इसके नकारात्मक पक्ष के रूप में अश्लीलता और हिंसा को भी समाज में परोसा जा रहा है, जिसका बच्चों और युवाओं पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

वक्ताओं ने माना कि तकनीक ने बच्चों की पढ़ाई, जानकारी और बौद्धिक विकास में भी अहम योगदान दिया है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए एक सशक्त रेगुलेशन बॉडी की आवश्यकता है, जो अश्लीलता और हिंसा फैलाने वाले कंटेंट पर रोक लगाने के साथ-साथ ऐसे कंटेंट बनाने वालों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर सके।

नोएडा की घटना को बेहद विचलित करने वाली बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह कोई एकमात्र घटना नहीं है। रील बनाने की होड़ में युवा पीढ़ी खतरनाक स्टंट और गतिविधियों में संलग्न हो रही है, जिनकी खबरें लगातार मीडिया में सामने आ रही हैं।

बैठक में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि आधुनिक तकनीक का सदुपयोग किया जाए तो यह व्यक्ति को सफलता के शिखर तक भी पहुंचा सकती है, लेकिन इसके लिए जागरूकता, नियंत्रण और सामाजिक जिम्मेदारी बेहद आवश्यक है।

इस अवसर पर प्रशान्त कौशिक, पुष्पेंद्र शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार), रिचा सिंह (राष्ट्रीय महासचिव, महिला प्रकोष्ठ, रालोद), सरला सिंह (प्रदेश सचिव), जगमोहन शाकाल (वरिष्ठ पत्रकार), पंडित अश्वनी कौशिक (अध्यक्ष युवा ब्राह्मण समाज), आरके भटनागर (सेवानिवृत्त कमिश्नर), डॉ. प्रेम कुमार शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य), हर्षवर्धन राजवंशी बिट्टन (समाजसेवी), प्रदीप वत्स (वरिष्ठ पत्रकार), गिरिश भारद्वाज, दीपक शर्मा, कंवलजीत सिंह (चेयरमैन गुरुकुलम स्कूल), सौरभ दिवाकर शर्मा, गौरव शर्मा (शिक्षक), गौरव यादव (पत्रकार) और रुद्राक्ष सिंह (फुटबॉल खिलाड़ी) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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