निठारी कांड पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:19 साल बाद मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली सभी मामलों में बरी, अदालत ने सबूतों को बताया झूठा | Nithari Case

नई दिल्ली। देश को दहला देने वाले निठारी हत्याकांड (Nithari Case) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि कोली के खिलाफ पेश किए गए सबूत झूठे, अविश्वसनीय और कानूनी रूप से अस्वीकार्य थे।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा —

“सुरेंद्र कोली के खिलाफ कोई ठोस वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था। केस संदेह से परे साबित नहीं हो सका। 19 साल बाद अब कोली को न्याय मिला है।”


🧩 क्या था निठारी कांड?

साल 2005-06 में नोएडा के निठारी गांव (सेक्टर-31) से कई बच्चों और महिलाओं के कंकाल और अवशेष बरामद होने से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।

पुलिस ने सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान कोली पर अपहरण, बलात्कार, हत्या और नरभक्षण जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए गए।

निचली अदालत ने कोली को 10 मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि —

  • फोरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट में कई विरोधाभास थे।
  • कथित कबूलनामे के कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिले।
  • गवाहों के बयान असंगत और असत्यापित पाए गए।

अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध साबित करने में असफल रहा, इसलिए कोली को ‘संदेह का लाभ’ मिलना चाहिए।


🚨 रिहाई की प्रक्रिया शुरू

फैसले के बाद सुरेंद्र कोली की रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अदालत ने जेल प्रशासन को आदेश दिया कि यदि कोली किसी अन्य केस में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए

गौरतलब है कि सह-आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर पहले ही कुछ मामलों में बरी हो चुके हैं।


🗣️ कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था के ‘संदेह का लाभ अभियुक्त को’ (Benefit of Doubt) सिद्धांत को और मजबूत करता है।
साथ ही यह मामला सीबीआई और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल भी उठाता है।


📌 निठारी केस टाइमलाइन (संक्षेप में)

वर्षघटना
2005-06निठारी में बच्चों के गायब होने की घटनाएं शुरू
दिसंबर 2006पुलिस ने नाले से कई कंकाल बरामद किए
2007कोली और पंढेर की गिरफ्तारी
2014कोली को फांसी की सजा की पुष्टि
2023पंढेर कुछ मामलों में बरी
2025सुप्रीम कोर्ट ने कोली को सभी मामलों में बरी किया

🔖 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल निठारी कांड की दिशा बदलता है, बल्कि जांच एजेंसियों के कामकाज पर भी गहरे सवाल खड़े करता है।
19 साल बाद आया यह निर्णय बताता है कि न्याय में देर भले हो, पर अन्याय नहीं होना चाहिए।