बहसूमा।
एनएच-119 बहसूमा बायपास झुनझुनी रोड स्थित जेएसएस पब्लिक स्कूल के समीप चार ग्रामों—राजूपुर, फतेहपुर हंसापुर, मोड़ कला एवं मोहम्मदपुर शाकिस्त—की कृषि भूमि के अधिग्रहण में बाजार मूल्य से कम मुआवजा दिए जाने को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार तीव्र होता जा रहा है। पिछले लगभग पाँच वर्षों से मुआवजा बढ़ोतरी की मांग कर रहे किसानों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित कर प्रशासन के रवैये के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया।
बैठक के दौरान किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ आगमन के दौरान 21 जनवरी की रात संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कैप्टन एवं कोषाध्यक्ष व प्रवक्ता कपिल चहल को पुलिस प्रशासन द्वारा उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया। किसानों का कहना है कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास है, जिससे किसानों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही मांगों को इस प्रकार कुचलने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसानों ने बताया कि लगभग आठ माह पूर्व जिलाधिकारी मेरठ द्वारा इस मामले में एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह स्वीकार किया कि किसानों को भूमि का मुआवजा बाजार दर से बेहद कम दिया गया है तथा 540 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से ब्याज सहित मुआवजा दिया जाना न्यायोचित है। इसके बावजूद समिति की रिपोर्ट पर अब तक कोई अमल न होने से किसानों में गहरी निराशा और असंतोष व्याप्त है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं हस्तक्षेप कर समिति की रिपोर्ट को शीघ्र लागू कराएं और प्रभावित किसानों को उनका वैध अधिकार दिलाया जाए। बैठक में बिजनौर लोकसभा सांसद चंदन चौहान के प्रतिनिधि युगांश राणा भी उपस्थित रहे, जिन्होंने किसानों की समस्याओं को सुना और उन्हें उचित समाधान का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर किसान नेता कपिल चहल, पूर्व चेयरमैन विनोद चाहल, सुभाष कैप्टन, नरेंद्र सिंह चाहल, प्रवेश जैनर, प्रवेश अहलावत, पिंटू देशवाल, शोकिंद्र, जोगेंद्र सिंह, सुनीत कुमार, राहुल देशवाल, मनीष, योगेंद्र, हरेंद्र चहल, पप्पू जैनर, मूलचंद सैनी, राजीव जैनर, मुखिया, राजकुमार, बबलू, दिनेश कुमार, मारुत देशवाल, श्रवण कुमार सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
किसानों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
