मेरठ के बहसूमा में रेप पीड़िता की इलाज के दौरान मौत से तनाव फैल गया। गांव छावनी में बदला, भारी पुलिस बल के साये में अंतिम संस्कार हुआ।

मेरठ में दरिंदगी के बाद मौत: दुष्कर्म पीड़िता के अंतिम संस्कार पर भारी तनाव, गांव छावनी में तब्दील

बहसूमा (मेरठ): उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बहसूमा क्षेत्र में दुष्कर्म की शिकार हुई किशोरी ने तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शुक्रवार शाम दम तोड़ दिया। पीड़िता की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में तनाव फैल गया और हालात बेकाबू होने लगे।

गांव बना छावनी, मीडिया और बाहरी लोगों की एंट्री बंद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। गांव के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और बाहरी व्यक्तियों के साथ-साथ मीडिया के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।

🏥 वेंटिलेटर पर तीन दिन चला संघर्ष

परिजनों के अनुसार, किशोरी पिछले तीन दिनों से अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती थी। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद शुक्रवार शाम उसने अंतिम सांस ली। शव गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा और करीब 40 मिनट तक हंगामा चलता रहा।

⚠️ पुलिस की सख्ती, समझाइश के बाद हुआ अंतिम संस्कार

स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया।

मेरठ के बहसूमा में रेप पीड़िता की इलाज के दौरान मौत से तनाव फैल गया। गांव छावनी में बदला, भारी पुलिस बल के साये में अंतिम संस्कार हुआ।
मेरठ के बहसूमा में रेप पीड़िता की इलाज के दौरान मौत से तनाव फैल गया। गांव छावनी में बदला, भारी पुलिस बल के साये में अंतिम संस्कार हुआ।

🚨 नेताओं की नजरबंदी, कई हिरासत में

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कई राजनीतिक और सामाजिक नेताओं को रोका—

  • विजयपाल कश्यप (जिला अध्यक्ष, सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ) को उनके आवास से नजरबंद किया गया।
  • देवेंद्र कश्यप (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सामाजिक न्याय पार्टी) को समर्थकों सहित रामराज थाने में रोका गया।

इसके अलावा हरिओम कश्यप, बनारसी दास कश्यप, जगरोशन कश्यप और महेश कश्यप समेत कई स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई।

🏛️ प्रशासन का पक्ष

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांव में शांति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने दबाव बनाकर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराया, जबकि पुलिस इसे कानून-व्यवस्था की मजबूरी बता रही है।

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