सुप्रीम आदेश को चुनौती मेरठ कमिश्नर को पड़ी भारी, तबादला: कुछ घंटे पहले ही कमिश्नर ने सुप्रीमकोर्ट को नजरअंदाज कर जारी किया था एक आदेश
मेरठ। अवैध सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के बाद शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक हलचल का कारण बन गया है। मेरठ मंडलायुक्त ऋषिकेश यशोद भास्कर का तबादला उस समय कर दिया गया, जब उन्होंने एक ऐसा आदेश जारी किया जिसे “सुप्रीमकोर्ट के आदेश को चुनौती” के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सुप्रीमकोर्ट के आदेश के तहत सेंट्रल मार्केट में अवैध दुकानों का ध्वस्तीकरण चल रहा था। लेकिन मंडलायुक्त ने अपने आदेश में—
- ध्वस्तीकरण पर अस्थायी रोक लगा दी,
- और 2012 में रद्द किए जा चुके सरकारी भूमि (आवासीय प्लॉट) पर कथित पीड़ित व्यापारियों को अस्थायी दुकानें लगाने की अनुमति दे दी।
यह आदेश जारी होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। आदेश को दिखाकर BJP सांसद, विधायक, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तौगी सहित पार्टी पदाधिकारियों ने मिठाइयाँ बाँटीं, आतिशबाजी की और बाजार खुलने का ऐलान कर दिया।
लेकिन कुछ ही घंटों बाद प्रदेश सरकार ने मंडलायुक्त ऋषिकेश यशोद भास्कर का तबादला कर दिया, जिससे पूरा प्रशासनिक तंत्र हिल गया।
यह आदेश 27 अक्टूबर 2025 को हुआ था, जब मंडलायुक्त ने BJP सांसद, विधायक, महापौर, नगर आयुक्त, SE आवास विकास और XEN आवास विकास के साथ बैठक के बाद यह फैसला लिया था।
अब सवाल उठ रहा है, क्या एक वरिष्ठ अधिकारी ने सुप्रीमकोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर निर्णय लिया? या फिर राजनीतिक दबाव में लिया गया यह कदम ही उनके तबादले की असली वजह बना?
फिलहाल मेरठ में सेंट्रल मार्केट प्रकरण प्रशासन और न्यायपालिका के टकराव का प्रतीक बन गया है।