मेरठ। मीट फैक्ट्री संचालन को लेकर लगे आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता संगीत सोम का बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोपों पर सफाई देते हुए संगीत सोम ने कहा,
“अतुल प्रधान छोटा भाई है। छोटे भाई को सब माफ होता है। वो मीट ले आते होंगे वहां से, मुझे पता नहीं है।”
नेता जी के इस बयान ने न केवल सवालों की संख्या बढ़ा दी है, बल्कि जवाबों को भी और उलझा दिया है। जहां एक ओर गंभीर आरोपों पर स्पष्ट जवाब की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर बयान ऐसा आया मानो मामला कोई पारिवारिक डिनर की खरीदारी का हो।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस मुद्दे पर प्रशासनिक जांच और जवाबदेही की बात होनी चाहिए थी, वहां “छोटा भाई” वाला तर्क राजनीतिक बयानबाजी में नया मुहावरा बनता दिख रहा है। बयान से यह साफ नहीं हो पाया कि आरोप निराधार हैं या जानकारी का अभाव है—दोनों ही स्थितियां सवाल खड़े करती हैं।
स्थानीय स्तर पर भी यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। आम लोगों का कहना है कि जब आम आदमी पर आरोप लगते हैं तो कानून सवाल पूछता है, लेकिन राजनीति में रिश्तों की ढाल कई बार जवाब से ज्यादा मजबूत नजर आती है।
फिलहाल मीट फैक्ट्री से जुड़े आरोपों की सच्चाई क्या है, यह जांच का विषय है, लेकिन इतना तय है कि “छोटा भाई है, माफ है” वाला बयान सियासत में तंज का नया अध्याय जोड़ गया है।
