ध्वस्तीकरण या दबंगई? मवाना में MDA टीम पर पत्रकार से गाली-गलौच और मारपीट के आरोप
मवाना में MDA का बुलडोजर एक्शन बना विवाद: कवरेज कर रहे पत्रकार को घेरकर पीटा, वीडियो वायरल
मवाना।
मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब मवाना खुर्द स्थित कोर्ट रेजिडेंसी कॉलोनी में चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान मीडियाकर्मी के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया। इस घटना के बाद न केवल स्थानीय लोगों में रोष है, बल्कि पत्रकारों में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि MDA की प्रवर्तन टीम अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान कवरेज के लिए पहुंचे एक मीडियाकर्मी के साथ गाली-गलौच, धक्का-मुक्की और मारपीट के आरोप लगे हैं। आरोप है कि टीम के प्रभारी बाबू खान और उनके साथ मौजूद काले कपड़ों में हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों ने न केवल मीडियाकर्मी से बदसलूकी की, बल्कि उनका मोबाइल छीनने का भी प्रयास किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मीडियाकर्मी ने विरोध किया तो करीब एक दर्जन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और धक्का-मुक्की करते हुए मारपीट की। इस पूरी घटना का वीडियो मौके पर मौजूद लोगों ने बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इधर, स्थानीय निवासियों ने MDA की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि ध्वस्तीकरण अभियान केवल खानापूर्ति तक सीमित रहा। कुछ चुनिंदा निर्माणों पर ही बुलडोजर चलाया गया, जबकि कई अन्य अवैध निर्माणों को नजरअंदाज कर दिया गया। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह पक्षपातपूर्ण प्रतीत होती है।
घटना के बाद पीड़ित मीडियाकर्मी ने MDA अधिकारी अर्पित यादव और सहायक अभियंता निकेता सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद मामले की सूचना थाना मवाना प्रभारी निरीक्षक पूनम जादौन और सीओ मवाना पंकज लवानिया को दी गई, लेकिन पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी हुई।
सूचना के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय को जानकारी देने के लगभग 20 मिनट बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। तब तक MDA की टीम कोर्ट रेजिडेंसी कॉलोनी से आगे राफन मोड़ स्थित एक अन्य कॉलोनी में पहुंच चुकी थी।
मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने जब MDA अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही, तो उन्हें भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि यदि मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाएगा, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बुलडोजर की कार्रवाई से उठे धूल के गुबार के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कानून का राज है या फिर ताकत का प्रदर्शन?