हस्तिनापुर को फिर से चमकाने का संकल्प: शिक्षाविद् सुनील पोसवाल की कविता बनी जनभावना की आवाज़

हस्तिनापुर (मेरठ)।
भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हस्तिनापुर को पुनः उसके गौरवशाली स्वरूप में स्थापित करने की जनभावना अब साहित्य और विचार के माध्यम से भी मुखर होने लगी है। इसी क्रम में शिक्षाविद् सुनील पोसवाल द्वारा रचित एक भावपूर्ण कविता इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हस्तिनापुर के विकास के संकल्प को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है।

सुनील पोसवाल की यह कविता हस्तिनापुर को केवल एक नगर नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की राजधानी, महाभारत की कर्मभूमि और भारतीय संस्कृति की आत्मा के रूप में प्रस्तुत करती है। कविता में हस्तिनापुर की पहचान सनातन धर्म के साथ-साथ हिंदू, जैन और सिख परंपराओं से जुड़ी पावन भूमि के रूप में की गई है, जो इसे विश्व पटल पर विशेष स्थान दिलाती है।

कविता के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जिस प्रकार मथुरा और अयोध्या को धार्मिक पर्यटन और विकास की दृष्टि से नई पहचान मिली, उसी प्रकार हस्तिनापुर भी उसी सम्मान और विकास का अधिकारी है। लेखक ने राष्ट्रीय संग्रहालय की परिकल्पना, पुरातात्विक महत्व और घोषित विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक नगरी के पुनरुत्थान का संकेत बताया है।

मोदी–योगी ने ठाना है,
हस्तिनापुर को फिर से चमकाना है।
अमूल्य धरोहर है यह राष्ट्र की,
विश्व पटल पर इसकी पहचान बनाना है।

प्राचीन भारत की राजधानी यह,
महाभारत की अमर कहानी है।
कौरव–पांडव की कर्मभूमि रही,
संस्कृति की यह अनुपम निशानी है।

सनातन की पावन धरा यह,
हिंदू, जैन, सिखों की शान है।
अवतारों की जन्मभूमि यह,
धर्म और कर्म की पहचान है।

मथुरा, अयोध्या को सजाया आपने,
विकास से उनका मान बढ़ाया।
राम–कृष्ण के सम्मान में,
हर हिंदू को फिर से जगाया।

हस्तिनापुर भी धर्म नगरी है,
यह बात आपने पहचानी है।
राष्ट्रीय संग्रहालय का प्रस्ताव देकर,
इस भूमि को नई उड़ान दिलाई है।

पांच सौ करोड़ की सौगात देकर,
विकास के पथ पर इसे चलाया है।
कौरव–पांडव की इस नगरी की,
फिर से दुनिया में शान बढ़ाई है।

पुरातत्व बोल रहा है आज,
इतिहास स्वयं प्रमाण बना है।
हस्तिनापुर अब चमक रहा,
भारत का गौरव बढ़ा रहा है।

मोदी–योगी से देश कहे,
हस्तिनापुर को भी जिला बनाओ।
मथुरा–अयोध्या की तरह इसको,
विश्व मंच पर फिर से लाओ।

सनातन संस्कृति की शान है यह,
भारत की आत्मा की पहचान है।
जन–जन बोले एक स्वर में,
आपके नेतृत्व से भारत महान है।

मोदी–योगी ने ठाना है,
हस्तिनापुर को फिर से चमकाना है।

शिक्षाविद् सुनील पोसवाल ने अपनी रचना में इस बात पर जोर दिया है कि हस्तिनापुर के लिए घोषित विकास कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। कविता में कौरव–पांडवों की नगरी, पुरातत्वीय प्रमाणों और ऐतिहासिक विरासत को वर्तमान विकास से जोड़ते हुए एक सशक्त भावनात्मक संवाद स्थापित किया गया है।

स्थानीय बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों का मानना है कि ऐसी रचनाएं जनमानस में ऐतिहासिक चेतना को जागृत करने का कार्य करती हैं। कविता के माध्यम से उठाई गई हस्तिनापुर को जिला बनाए जाने और इसे मथुरा-अयोध्या की तरह वैश्विक पहचान दिलाने की भावना लोगों के बीच तेजी से समर्थन पा रही है।

कुल मिलाकर, सुनील पोसवाल की यह कविता केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि हस्तिनापुर के विकास, सम्मान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की सामूहिक आवाज़ बनकर उभरी है, जो आने वाले समय में सामाजिक और प्रशासनिक विमर्श का अहम हिस्सा बन सकती है।

सुनील पोसवाल