कलम की ताकत: हस्तिनापुर में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद, बारहसिंगा अभ्यारण्य से अवैध मिट्टी खनन का भंडाफोड़
हस्तिनापुर में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद
हस्तिनापुर। राज्य बारहसिंगा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में अवैध खनन का एक गंभीर मामला सामने आया है। गुरुवार देर शाम करीब 06:00 बजे गश्त के दौरान हस्तिनापुर वन रेंज के अंतर्गत आरक्षित वन क्षेत्र अर्जुन–द्रौपदीवन ब्लॉक के मध्य से गुजरते हुए मिट्टी से लदा एक ट्रक वन विभाग की टीम ने पकड़ लिया।
जांच के दौरान वाहन चालक ने बताया कि यह मिट्टी ग्राम इकवारा से खनन कर बांध निर्माण कार्य के लिए ले जाई जा रही है। जब चालक से खनन और आरक्षित वन भूमि से मिट्टी परिवहन से संबंधित वैध अनुमति मांगी गई, तो उसने ठेकेदार सचिन के माध्यम से शिवशक्ति मेसर्स के नाम खसरा संख्या 697 की एक ऑनलाइन अनुमति प्रस्तुत की, जो जिलाधिकारी कार्यालय के खनन अनुभाग से प्राप्त बताई गई।
वन विभाग द्वारा की गई गहन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उक्त खसरा संख्या 697 राज्य बारहसिंगा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसके अलावा ठेकेदार से आरक्षित वन ब्लॉक से मिट्टी परिवहन की वैध अनुमति प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन इस संबंध में कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।
जांच में यह तथ्य पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि राज्य बारहसिंगा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र से अवैध रूप से मिट्टी का खनन किया गया और उसे आरक्षित वन क्षेत्र से गैरकानूनी तरीके से परिवहन किया जा रहा था। यह मामला वन कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।
इस पूरे प्रकरण में भारतीय वन अधिनियम, 1927 एवं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन चालक एवं शिवशक्ति मेसर्स के ठेकेदार सचिन के विरुद्ध H2 श्रेणी का केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई की गई है।
वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती जारी रही तो वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा संभव हो सकेगी।