हस्तिनापुर के कण-कण में बसी अमर गाथा: जानिए इतिहास जो आज भी जीवित है – सुनील पोसवाल के साथ
हस्तिनापुर के कण-कण में बसती अमर गाथा: शिक्षाविद् सुनील पोसवाल ने कविता के माध्यम से जीवंत किया इतिहास
हस्तिनापुर के इतिहास, सनातन संस्कृति, महाभारत की गाथाओं और धार्मिक विरासत को समेटे शिक्षाविद् सुनील पोसवाल की कविता ने देश का ध्यान आकर्षित किया।
हस्तिनापुर.. महाभारत कालीन नगरी हस्तिनापुर का इतिहास आज भी भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को जीवित रखे हुए है। इसी धरोहर को संरक्षित और जन-जन तक पहुंचाने का कार्य पिछले 15 वर्षों से लगातार हस्तिनापुर के ग्राम रानी नगला निवासी शिक्षाविद् सुनील पोसवाल कर रहे हैं।
उन्होंने हस्तिनापुर के गौरवशाली इतिहास को संकलित कर विभिन्न माध्यमों से सरकार तक पहुँचाया, जिसका असर अब देश की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार की नीतियों में भी दिखाई देने लगा है।
हाल ही में उनकी लिखी कविता ने हस्तिनापुर की प्राचीन गाथा, धार्मिक विरासत, महाभारत कालीन चरित्रों, जैन तीर्थ, सनातन संस्कृति और पर्यटन की अपार संभावनाओं को जीवंत कर दिया है। यह कविता न केवल भावनात्मक रूप से जोड़ती है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को हस्तिनापुर की पहचान से रूबरू कराती है।
हस्तिनापुर — ऋषि, मुनियों और धर्म की पवित्र धरा
कविता में बताया गया है कि हस्तिनापुर के कण-कण में ऋषि-मुनियों की गाथा बसती है।
राजा हस्ती, राजा भरत, भीष्म, युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, कर्ण जैसे महाभारत के महान चरित्रों की दिव्य गाथा यहीं से जुड़ी रही है।
इसी भूमि से भारत को “भारत” नाम मिला — यह बात इतिहास को गौरवान्वित करती है।

धर्म व आध्यात्म का केंद्र
कविता में वर्णित है कि—
- माता द्रोपदी घाट
- पांडेश्वर महादेव मंदिर
- विदुर कुटी
- जयंती माता शक्तिपीठ
- कर्ण मंदिर
- अमृतकूप
- महर्षि दुर्वासा मंदिर
ये सभी स्थल हस्तिनापुर की आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण हैं।
जैन धर्म के तीर्थों की शान
हस्तिनापुर जैन धर्म के लिए भी उतना ही पवित्र माना जाता है। यहाँ आदिनाथ, शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ की गाथाएं और जम्बूद्वीप व अष्टापद संरचना जैन आस्था को पंख देती है।
पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र
आज हस्तिनापुर केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का भी मजबूत केंद्र बनता जा रहा है।
सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों की निष्ठा के कारण हस्तिनापुर एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान के केंद्र में लौटता दिखाई दे रहा है।
हस्तिनापुर के कण-कण में ऋषि मुनियों की गौरव गाथा है।
राजा हस्ती से हस्तिनापुर बना ऐसा वर्णन आता है।
राजा दुष्यंत, भरत, भीष्म, युधिष्ठिर के सत्य, भीम के पराक्रम, अर्जुन के धनुर्धर,
नकुल सहदेव के शौर्य संग दानवीर कर्ण की यह अमर गाथा है।
राजा भरत से भारत नाम मिला जो इतिहास को गौरवान्वित कराता है।
श्री कृष्ण की लीला संग कौरव पांडव की गाथा है।
महारानी शकुंतला, सत्यवती, कुंती, गांधारी संग माधरी से भी इसका नाता है।
माता द्रोपदी घाट पर स्नान करने से चर्म रोग मिट जाता है।
माता द्रोपदी की कृपा है हस्तिनापुर पर जन-जन की यह गाथा है।
सनातन संस्कृति का केंद्र रहा हस्तिनापुर ऐसा कहा जाता है।
मां गंगा और पुत्र भीष्म की वार्ता महाभारत की गाथा है।
गुरु द्रोणाचार्य की शिक्षा-दीक्षा में धनुर्धरो का वर्णन आता है।
जैन धर्म के तीर्थंकरों की मिलती यहां गाथा है।
आदिनाथ का इक्षु रस से प्रथम आहार हुआ यह इतिहास में आता है।
भगवान शान्ति, कुंथु, अरहनाथ की जन्मभूमि है हस्तिनापुर
गणिनी प्रमुख आर्यका ज्ञानमती माता की रचना से मन खुश हो जाता है।
हस्तिनापुर के कण कण में ऋषि मुनियों की गाथा है।
पुण्य भूमि है देश धर्म की रामायण महाभारत में भी इसका वर्णन आता है।
शस्त्र-शास्त्र का केंद्र रहा हस्तिनापुर मिलती यह गाथा है।
जड़ी बूटियों से परिपूर्ण है यह धरा ऐसा कहा जाता है।
हस्तिनापुर के कण कण में ऋषि मुनियों की गाथा है।
गुरु गोविंद सिंह के पंच प्यारे भाई धर्म सिंह से भी इसका नाता है।
राजा नैनसिंह गुर्जर के सनातन रक्षक होने की यह गाथा है।
इतिहास समेटे है हस्तिनापुर यहाँ के मंदिरों से दिख जाता है।
माता द्रोपदी घाट, भगवान शंकर के पांडेश्वर, विदुर कुटी, जयंती माता शक्तिपीठ,
द्रोपदेश्वर, कर्ण मंदिर, मां कामाख्या मंदिर, रघुनाथ महल और अमृत कूप
संग बाबा हरिदास की कुटी महर्षि दुर्वासा के मंदिर की यह अमर गाथा है।
जैन धर्म का बड़ा मंदिर, जम्बूद्वीप और अष्टापद संग कैलाश पर्वत की रचना,
चिदायतन का भी वर्णन आता है।
आओ चले हस्तिनापुर की ओर हस्तिनापुर हमें बुलाता है।
हस्तिनापुर के कण-कण में ऋषि मुनियों की गाथा है।
महर्षि वेदव्यास ने रचना की हस्तिनापुर की ऐसा वर्णन शास्त्रों में आता है।
प्रकृति और परमात्मा के संगम का केंद्र है हस्तिनापुर ऋषि मुनियों की गाथा है।
पर्यटन और संस्कृति का केंद्र है हस्तिनापुर यह सौभाग्य हमारा है।
हस्तिनापुर के कण कण में ऋषि मुनियों की गाथा है।
हस्तिनापुर पुकार रहा है…
सुनील पोसवाल की कविता का भाव यही कहता है —
“आओ चले हस्तिनापुर की ओर… हस्तिनापुर हमें बुलाता है।”