भाकियू मुजफ्फरनगर जिला कार्यकारिणी भंग

भाकियू में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, मुजफ्फरनगर जिला कार्यकारिणी भंग, नए नेतृत्व की तैयारी तेज

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) में इस समय बड़े संगठनात्मक बदलाव की स्पष्ट आहट सुनाई दे रही है। प्रयागराज में चल रहे राष्ट्रीय चिंतन शिविर अधिवेशन के दौरान शीर्ष नेतृत्व ने मुजफ्फरनगर जिला कार्यकारिणी को भंग करने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय अधिवेशन के अंतिम दिन से पहले ही लागू कर दिया गया, जिससे जिले से लेकर ब्लॉक, नगर और तहसील स्तर तक संगठन में हलचल मच गई है।

भाकियू के भीतर बीते कई महीनों से चल रही आंतरिक चर्चाओं और पुनर्गठन की अटकलों के बीच यह फैसला संगठन को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। जिला कार्यकारिणी भंग होने के साथ ही दर्जनों पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं, जिसके बाद संगठन में नए चेहरों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

इसी बीच प्रदेश युवा प्रभारी अनुज सिंह के इस्तीफे की खबर ने संगठन का माहौल और गर्म कर दिया। सोशल मीडिया पर फैली इस सूचना को भाकियू के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से लिया और मामला राष्ट्रीय समन्वय समिति के समक्ष रखा गया। समिति ने विचार-विमर्श के बाद अनुज सिंह का इस्तीफा नामंजूर कर दिया। संगठन की ओर से स्पष्ट किया गया कि नए युवा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति तक अनुज सिंह पूर्ववत अपने पद पर कार्यरत रहेंगे, जिससे युवा मोर्चे में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है।

भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने जानकारी देते हुए बताया कि शीर्ष नेतृत्व के आदेशानुसार मुजफ्फरनगर की संपूर्ण जिला कार्यकारिणी को अगले आदेश तक भंग किया गया है। हालांकि, संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से कुछ इकाइयों और पदाधिकारियों को उनके पदों पर बरकरार रखा गया है। इनमें ब्लॉक जानसठ, बघरा और बुढ़ाना की ब्लॉक इकाइयाँ यथावत रहेंगी।

इसके अलावा श्रीकांत (जिला सचिव, चरथावल) और जयवीर सिंह (जिला उपाध्यक्ष) को जिला कार्यकारिणी में बनाए रखा गया है। वहीं महानगर अध्यक्ष गुलबहार राव, भोकरहेड़ी और सिसौली के नगर अध्यक्ष, तथा सदर तहसील अध्यक्ष देव अहलावत को भी बदलाव से बाहर रखा गया है। इन पदों को छोड़कर अन्य सभी जिला, ब्लॉक, नगर और तहसील कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।

मुजफ्फरनगर इकाई में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब संगठन में नए पदाधिकारियों की घोषणा को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय चिंतन शिविर के दौरान संगठनात्मक सुदृढ़ता, किसान मुद्दों पर नई रणनीति और जमीनी स्तर पर मजबूत टीमों के गठन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाकियू जिले में नई ऊर्जा और नए नेतृत्व के साथ मैदान में उतरेगी।