भोजन की बहस नहीं, ‘संतुलित भोजन’ है समाधान – बहसूमा में ग्रामीणों ने रखी बड़ी बात
भोजन की बहस नहीं, संतुलन है समाधान
बहसूमा, मेरठ: शाकाहार बनाम मांसाहार की बहस पर ग्रामीणों ने कहा कि समाधान किसी एक भोजन पद्धति में नहीं, बल्कि संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक आहार में है। लोगों ने जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
बहसूमा । ग्रामीण क्षेत्र बहसूमा में भोजन को लेकर चलने वाली शाकाहार बनाम मांसाहार की बहस पर स्थानीय लोगों ने संतुलित और परिपक्व राय रखी। ग्रामीणों ने कहा कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और जीवनशैली का प्रतिबिंब है। धीर सिंह ने कहा कि देश में अक्सर शाकाहारी और मांसाहारी भोजन को लेकर बहस गर्म हो जाती है, जो कई बार स्वास्थ्य की सीमाओं से आगे बढ़कर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप ले लेती है, जबकि असली मुद्दा भोजन का प्रकार नहीं बल्कि संतुलन है।
सुभाष चंद्र ने कहा कि भारत की सभ्यता में जहां शाकाहार की पुरानी परंपरा है, वहीं मांसाहार भी लंबे समय से भारतीय खान-पान का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि दाल, रोटी, सब्जी और फल जितने जरूरी हैं, उतना ही मछली, मांस और अंडा भी कई लोगों के भोजन का महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे में किसी एक भोजन पद्धति को श्रेष्ठ और दूसरी को हीन बताना न तो वैज्ञानिक है और न ही सामाजिक रूप से उचित।
योगेंद्र का कहना है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी यह मानते हैं कि शाकाहारी भोजन जहां हल्का और पर्यावरण के लिए लाभकारी है, वहीं मांसाहारी भोजन शरीर को प्रोटीन, आयरन और विटामिन बी-12 जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। समस्या भोजन में नहीं बल्कि असंतुलन और अधिक सेवन में है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी बीमारियों का कारण शाकाहार या मांसाहार नहीं, बल्कि अनियमित दिनचर्या, जंक फूड का बढ़ता चलन और पोषण की अनदेखी है। चाहे भोजन कैसा भी हो, यदि वह संतुलित नहीं है तो शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
परविंदर ने कहा कि भोजन व्यक्ति की निजी पसंद है, इसे नैतिकता और श्रेष्ठता से जोड़ना गलत है। समाज में विभाजन की बजाय स्वस्थ भोजन और स्वच्छ जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि समाज के बेहतर निर्माण के लिए जरूरी है कि थाली में विविधता हो, मात्रा नियंत्रित हो और सोच उदार रहे। शाकाहारी बनाम मांसाहारी की बहस से आगे बढ़ने का समय आ चुका है और अब लक्ष्य होना चाहिए — स्वस्थ भोजन, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज।