बेटियाँ फाउंडेशन

स्कूलों से पार्कों तक जागरूकता की नई लहर, ‘जल ही जीवन है’ का संदेश दे रही बेटियाँ फाउंडेशन

मेरठ। बढ़ते जल संकट के बीच बेटियाँ फाउंडेशन द्वारा चलाया जा रहा जल संरक्षण अभियान शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक एक नई जागरूकता की लहर पैदा कर रहा है। फाउंडेशन के नेतृत्व में गाँव महुखास सहित आसपास के क्षेत्रों में आंगनबाड़ी महिलाओं के संयुक्त प्रयास से मेले, चौपाल, स्कूल, पार्क और मोहल्लों में निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को जल की महत्ता समझाई जा रही है। अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहीं कुसुम मित्तल जी ने कहा कि आने वाला भविष्य तभी सुरक्षित होगा, जब आज की पीढ़ी पानी की हर बूंद की कीमत समझे और अनावश्यक बर्बादी को रोके।

गाँवों की चौपालों पर आयोजित संवाद कार्यक्रमों में बुजुर्गों ने पुराने समय की जल संरक्षण परंपराओं को याद करते हुए युवाओं को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कैसे तालाब, कुएँ और बावड़ियाँ कभी जीवन का आधार हुआ करती थीं और आज फिर से उन्हें सहेजने की ज़रूरत है। बुजुर्गों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जल बचाना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है।

इस अवसर पर अमिता अरोड़ा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को “जल ही जीवन है” के संदेश से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

कार्यक्रम के दौरान मीना, सुचित्रा, रेनु और कमलेश को जल संरक्षण अभियान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ‘जल सखी’ की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, संस्था की अध्यक्ष अंजु पांडेय ने उपस्थित सभी लोगों को कंबल वितरित किए और नव-नियुक्त जल सखियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।

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