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बहसूमा क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से रबी फसलें प्रभावित, किसानों की बढ़ी चिंता

बहसूमा क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से रबी फसलें प्रभावित

बहसूमा क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से रबी फसलें प्रभावित

बहसूमा : बहसूमा क्षेत्र में बीते कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड और सुबह-शाम छाए घने कोहरे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार कोहरे की चादर छाए रहने से खेतों में रबी की फसलों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण फसलों की प्राकृतिक बढ़वार प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर किसानों की मेहनत और आने वाली पैदावार पर पड़ता नजर आ रहा है।

स्थानीय किसान आशीष कुमार और परविंदर चौधरी का कहना है कि गेहूं की फसल में अपेक्षित हरियाली नहीं आ पा रही है। पौधों की लंबाई सामान्य स्तर तक नहीं बढ़ रही, जिससे उत्पादन घटने की आशंका गहराने लगी है। वहीं सरसों की फसल में फूल आने की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही मौसम बना रहा, तो सरसों में दाने भरने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

किसान योगेंद्र ने बताया कि आलू की फसल में भी लगातार नमी और ठंड के कारण समस्याएं सामने आ रही हैं। कई खेतों में आलू के पौधों की पत्तियों पर झुलसन के लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। यदि समय रहते मौसम साफ नहीं हुआ, तो रोग के फैलने का खतरा और भी बढ़ सकता है।

वहीं किसान राहुल कुमार का कहना है कि बढ़ती लागत, महंगे बीज, खाद और डीजल के बीच मौसम की मार ने खेती को और संकट में डाल दिया है। यदि जल्द ही मौसम में सुधार नहीं हुआ, तो नुकसान की भरपाई कर पाना किसानों के लिए बेहद कठिन हो जाएगा।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मौसम को देखते हुए फसलों में उचित पोषक तत्वों का छिड़काव, समय पर रोग नियंत्रण और खेतों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। जैसे ही धूप निकले, किसानों को तुरंत फसलों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, ताकि नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सके।

इस संबंध में क्षेत्र के कई किसानों और ग्रामीणों — सुभाष कैप्टन, पूर्व प्रधान सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, बाबूराम और ईश्वर सिंह — ने भी चिंता जताते हुए प्रशासन और कृषि विभाग से किसानों को मार्गदर्शन और राहत देने की मांग की है। फिलहाल किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि मौसम साफ हो और उनकी फसलें संभल सकें।