दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 19वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग उठाई जा रही है।
आंदोलन के समर्थन में जारी एक राजनीतिक बयान में कहा गया है कि पिछले 18 दिनों से सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बयान में यह भी कहा गया कि यदि सरकार छात्रों और जनता की आवाज़ का जवाब नहीं दे सकती, तो संबंधित मंत्री की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही यह मांग भी रखी गई कि संबंधित मंत्री को नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह एक राजनीतिक मांग है।
इसके अलावा बयान में कहा गया कि यदि लंबे अनशन के दौरान सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को कोई गंभीर नुकसान पहुंचता है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय की होगी। यह भी कहा गया कि सरकार को बताना चाहिए कि इतने दिनों तक शांतिपूर्ण आंदोलन पर संवाद क्यों नहीं हुआ।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन को लेकर भी आधिकारिक चिकित्सा बुलेटिन या सरकारी बयान का इंतजार है।
अब आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से औपचारिक बातचीत शुरू करती है या नहीं। साथ ही, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगे की स्थिति पर भी सभी की निगाहें बनी हुई हैं। सरकार या आंदोलनकारियों की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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